वियना में शरणार्थियों के बारे में यूरोप की शिखर बैठक
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शरणार्थियों का मामला अब भी यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है और इन देशों के अधिकारी शरणार्थियों के संबंध में एक संयुक्त नतीजे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep २५, २०१६ १३:४६ Asia/Kolkata

शरणार्थियों का मामला अब भी यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है और इन देशों के अधिकारी शरणार्थियों के संबंध में एक संयुक्त नतीजे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

शनिवार को वियना में शरणार्थियों के विषय में यूरोप के अनेक राष्ट्राध्यक्षों की सम्मिलिति से एक बैठक आयोजित हुई जिसमें आॅस्ट्रिया के चान्सलर क्रिस्टियन कर्न ने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे आपसी सहयोग से शरणार्थियों के संकट को यथाशीघ्र हल करने का प्रयास करें। इस बैठक में जर्मनी की चान्सलर एंगेला मर्केल ने कहा कि अयोग्य शरणार्थियों को उनके देश लौटाया जाए। मर्केल ने, जो शरणार्थियों के संबंध में अपनी लचकदार नीतियों के कारण आलोचना का पात्र बनती रही हैं, एक अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि अयोग्य शरणार्थियों को वापस लौटाने के संबंध में यूरोप को अन्य देशों के साथ समझौते का प्रयास करना चाहिए।

 

मर्केल का यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है जब इससे पहले तक वे शरणार्थियों के बारे में अन्य यूरोपीय नेताओं के मुक़ाबले में काफ़ी नर्म नीति अपनाए हुए थीं और जर्मनी ने काफ़ी शरणार्थियों का स्वागत किया था लेकिन अब उन पर अपने देश के विपक्षी दलों और इसी प्रकार पूर्वी यूरोप के देशों के नेताओं का भारी दबाव है। इसी लिए एेसा प्रतीत हो रहा है कि जर्मनी भी शरणार्थियों के बारे में कड़े क़ानून लागू करेगा। फ़्रान्स के राष्ट्रपति ओलांद ने भी कहा है कि वे अपने देश में शरणार्थी कैम्पों में वृद्धि की अनुमति नहीं देंगे। इटली के विदेश मंत्री का भी कहना है कि शरणार्थियों के संकट को नियंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि यह अगले दस से बीस बरसों तक जारी रहेगा। प्रत्येक दशा में यूरोप में शरणार्थियों का संकट जारी है और बहुत से देशों में युद्ध, राजनैतिक अस्थिरता, हिंसा, अशांति, आर्थिक समस्याओं और बेरोज़गारी जैसे कारकों ने इस संकट को और अधिक गहरा कर दिया है। अब तक इस संकट के बारे में जो नीतियां अपनाई गई हैं उनसे पता चलता है कि इस संकट को कड़े व अमानवीय तरीक़ों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता बल्कि यह संकट तभी समाप्त होगा जब संसार में न्याय व शांति स्थापित होगी और हिंसा व जनसंहार का ख़ातमा होगा। (HN)