हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अमेरिका पर युद्धापराध का आरोप लगाया
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यह पहली बार है जब कोई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्धापराधों के बारे में जांच- पड़ताल कर रही है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १५, २०१६ १६:०८ Asia/Kolkata

यह पहली बार है जब कोई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्धापराधों के बारे में जांच- पड़ताल कर रही है।

हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की एक न्यायधीश फातू बिनसूदा ने अमेरिका पर अफगानिस्तान में युद्धापराध का आरोप लगाया है और कहा है कि जांच- पड़ताल और प्राप्त दस्तावेज़ों के आधार पर अमेरिकी सैनिकों और सीआईए ने 2003 और 2004 के वर्षों में अमानवीय ढंग से जेल में बंद कैदियों को प्रताड़ित किया है।

बिन सूदा ने बल देकर कहा है कि मौजूद जानकारियां इस बात की सूचक हैं कि अमेरिकी सैनिकों और सीआईए के एजेन्टों ने कैदियों से पूछताछ के दौरान उन तरीकों को अपनाया जो युद्धापराध हैं। यह पहली बार है जब कोई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्धापराधों के बारे में जांच- पड़ताल कर रही है।

 हेग का न्यायालय अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय है और उसे नस्ली सफाया, मानवता के विरुद्ध अपराध और दूसरे अपराधों के बारे में कार्यवाही करने के लक्ष्य से बनाया गया है और उसका मुख्यालय हॉलैंड के हेग नगर में स्थित है।

प्रतीत यह हो रहा है कि हेग के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की ओर से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों और सीआईए के एजेन्टों के खिलाफ अपराध की घोषणा एक बड़ा कदम है। अब तक यह अमेरिका था जो दूसरे देशों पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाता था और प्रतिवर्ष दूसरे देशों में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में रिपोर्टें प्रकाशित करता था और बहुत से देशों पर मानवाधिकार के हनन का आरोप लगाता था।

अब तक अमेरिका नस्ली सफाया और युद्धापराध के संबंध में दूसरे देशों और व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने की बात करता रहा है परंतु अब उसे उसके सैनिकों के अपराध के लिए अपराधी घोषित किया गया है और अब देखना यह है कि इस मामले में उसके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है?

बहरहाल इस बात को भी याद रखना चाहिये कि 16 वर्षों से अमेरिका और नैटो के सैनिक अफगानिस्तान में मौजद हैं और उनकी यह उपस्थिति परिणामहीन रही है यहां तक कि कुछ अवसरों पर उनकी उपस्थिति अफगानिस्तान की स्थिति के और बदतर होने में सहायक रही है। इसी तरह इन सैनिकों की उपस्थिति के वर्षों में व्यवहारिक रूप से आतंकवादी गुटों की गतिविधियों में वृद्धि हुई है और तालेबान तथा दाइश ने अफगानिस्तान के काफी क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया है। MM