नेतेनयाहू जायोनी शासन की पराजय के जिम्मेदार हैं
गज्जा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन की पराजय के बारे में रिपोर्ट दिसंबर तक प्रकाशित हो जायेगी
जायोनी शासन के महानिरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट के अंतिम मसौदे में प्रधानमंत्री और पूर्व युद्ध मंत्री को ग़ज्जा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में इस्राईल की पराजय का ज़िम्मेदार बताया है। गज़्ज़ा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन को पराजित हुए ढाई साल का समय बीत जाने के बावजूद इस शासन को राजनीतिक और सैनिक क्षेत्रों में समस्याओं का सामना है।
इस प्रकार की स्थिति में जायोनी शासन के महानिरीक्षक यूसुफ शेपीरा ने शुक्रवार को वर्ष 2014 में गज्जा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में इस्राईल की पराजय के बारे में अपनी रिपोर्ट के अंतिम मसौदो को पेश किया।
इस मसौदे में घोषणा की गयी है कि यह पराजय प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू और पूर्व युद्धमंत्री मूशे यालून के कमजोर क्रिया- कलापों का परिणाम थी। इसी प्रकार उनकी रिपोर्ट के अंतिम मसौदे में आया है कि फिलिस्तीनी प्रतिरोध के मुकाबले में इस्राईल के सुरक्षा तंत्रों की कमजोरी भी इस पराजय का कारण थी।
अपेक्षा है कि गज्जा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन की पराजय के बारे में रिपोर्ट दिसंबर तक प्रकाशित हो जायेगी। वर्ष 2014 में ग़ज्जा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन की जो पराजय हुई सामाजिक, आर्थिक और सैनिक दृष्टि से इस शासन के लिए बहुत मंहगी पड़ी इस प्रकार से कि 50 दिवसीय युद्ध की समाप्ति के बाद जायोनी शासन की संसद नेसेट में राजनीतिक संकट में वृद्धि हो गयी और उस समय जायोनी शासन के कुछ अधिकारियों को अपने पदों से त्याग पत्र देना पड़ा और यह प्रक्रिया अब भी जारी है।
कुछ समय पहले जायोनी युद्धमंत्री मूशे यालून के त्याग पत्र को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है और जायोनी शासन के भीतर विस्तृत पैमाने पर बिनयामिन नेतेनयाहू की जो आलोचना हो रही है उससे लगता है कि अंत में उन्हें भी सत्ता छोड़नी पड़ेगी और जायोनी हल्कों से जो सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं वे इसी प्रकार की वास्तविकता की सूचक हैं।
बहरहाल गज़्ज़ा पट्टी के 50 दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन के विरुद्ध फिलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं का प्रहार इतना तीव्र था कि उसके झटके जायोनी शासन के हर क्षेत्र में आभास किये जा रहे हैं। MM