अमेरिका और चीन के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे हैं
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चीन ने दक्षिणी चीन सागर में प्रक्षेपास्त्रिक ढ़ाल व्यवस्था तैनात करके अमेरिका के मुकाबले में एक प्रकार का शक्ति प्रदर्शन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec १५, २०१६ १७:१० Asia/Kolkata

चीन ने दक्षिणी चीन सागर में प्रक्षेपास्त्रिक ढ़ाल व्यवस्था तैनात करके अमेरिका के मुकाबले में एक प्रकार का शक्ति प्रदर्शन किया है।

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता की बागडोर अभी नहीं संभाली है परंतु उन्होंने वाशिंग्टन और बीजींग के मध्य बहुत सारे मतभेदों को हवा दे दी है और ओबामा सरकार ने भी चीन के मुकाबले में आक्रामक नीति अपना ली है।

यह स्थिति इस बात का कारण बनी है कि चीनी सरकार ने अपनी नवीनतम चेतावनी में अमेरिका के साथ राजनीतिक संबंधों को जारी रखने को वाशिंग्टन द्वारा अखंड चीन पालिसी के प्रति कटिबद्ध रहने और अतीत में दोनों पक्षों के मध्य होने वाले समझौतों से जोड़ दिया है।

इसके अलावा चीन ने दक्षिणी चीन सागर में प्रक्षेपास्त्रिक ढ़ाल व्यवस्था तैनात करके अमेरिका के मुकाबले में एक प्रकार का शक्ति प्रदर्शन किया है।

इसी मध्य प्रशांत महासागर में अमेरिकी बेड़े के प्रमुख एडमिरल हेरी बी हेरीस जुनियर ने Harry B. Harris Jr. कहा है कि अगर चीन दक्षिणी चीन सागर में अपना दावा जारी रखता है तो अमेरिका चीनी सरकार से मुकाबले के लिए तैयार है। उनका यह बयान इस बात का सूचक है कि  वाशिंग्टन चीन के साथ एक गम्भीर चुनौती से मुकाबले की तैयारी कर रहा है।

चीन के साथ आर्थिक सहकारिता और पूंजी निवेश पर अमेरिका को कुछ आपत्ति है। क्योंकि चीन ने अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रखा है। चीन ने अमेरिका से जो बान्डस पेपर खरीद रखे हैं उनकी कीमत साढ़े 12 अरब से 1270 अरब डालर तक है। इस आधार पर अमेरिका को आर्थिक क्षेत्रों में चीन के साथ निवेश जारी रखने और आर्थिक समस्याओं के समाधान में चीन की सहायता की आवश्यकता है।

इन सबके बावजूद वाशिंग्टन चीन की आर्थिक सहकारिता पर आपत्ति जताकर अमेरिकी उत्पादों के लिए चीनी मंडियों के अधिक द्वार खोलने हेतु एक प्रकार से बीजींग पर दबाव डालने के प्रयास में है।

इसी लक्ष्य से डोनाल्ड ट्रंप वाइट हाउस में जाने से पहले ही अमेरिका की आर्थिक कठिनाइयों को चीनी वस्तुओं के अमेरिका में निर्यात को बता रहे हैं। MM