अमरीका में इस्राईली वस्तुओं की शिकायत में वृद्धि
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अमरीका के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिमी तट की ज़ायोनी काॅलोनियों में बनने वाली वस्तुओं के आयात के ख़िलाफ़ शिकायतें बढ़ती चली जा रही हैं। इन शिकायतों में कहा गया है कि इस्राईली वस्तुएं, उनके सही निर्माण स्थल के बारे में जानकारी पर आधारित अलग-अलग लेबलों के साथ आयात की जा रही हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०४, २०१७ १३:४८ Asia/Kolkata

अमरीका के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिमी तट की ज़ायोनी काॅलोनियों में बनने वाली वस्तुओं के आयात के ख़िलाफ़ शिकायतें बढ़ती चली जा रही हैं। इन शिकायतों में कहा गया है कि इस्राईली वस्तुएं, उनके सही निर्माण स्थल के बारे में जानकारी पर आधारित अलग-अलग लेबलों के साथ आयात की जा रही हैं।

इस्राईली वस्तुओं के ख़िलाफ़ शिकायतों के बावजूद अमरीका की कस्टम एजेंसी ने क़ानून का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की है। वर्ष 1995 के बाद पश्चिमी तट में बनाई गईं अनेक ग़ैर क़ानूनी काॅलोनियों के दृष्टिगत अमरीका के क़ानूनों के अनुसार ज़ायोनी काॅलोनियों में तैयार की गई वस्तुओं पर विशेष लेबल लगाए जाने चाहिए जिन पर यह यह लिखा होना चाहिए कि वह वस्तु पश्चिमी तट, ग़ज़्ज़ा पट्टी या किस स्थान की बनी हुई है लेकिन इसके बावजूद इस्राईली वस्तुएं "मेड इन इस्राईल" के लेबल के साथ अमरीका में भेजी जा रही हैं। इस्राईल को अपनी वस्तुओं के निर्माण का सटीक स्थान निर्धारित करने के लिए बाध्य करने का सिलसिला 2015 से शुरू हुआ था जब यूरोपीय संघ ने एक क़ानून पारित किया था जिसके अनुसार वर्ष 1967 के बाद अतिग्रहित होने वाले सभी क्षेत्रों अर्थात पश्चिमी तट, गोलान की पहाड़ियां और ग़ज़्ज़ा पट्टी में बनने वाली वस्तुओं पर विशेष लेबल लगा होना चाहिए ताकि ख़रीदने वाले को उनके निर्माण स्थल के बारे में पता चल जाए और फिर वह ख़रीदने या न ख़रीदने का निर्णय करे।

 

वर्ष 2007 में विदेशों में रह रहे कुछ फ़िलिस्तीनियों ने इस्राईल के बहिष्कार का आंदोलन आरंभ किया था जो अब व्यापक रूप धारण कर चुका है और यूरोप व अमरीका सहित संसार के अनेक देशों में लोगों की ओर से ज़ायोनी शासन में बनी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाता है। वस्तविकता यह है कि फ़िलिस्तीन के संबंध में इस्राईल की अतिग्रहणकारी, विस्तारवादी और काॅलोनी निर्माण की नीति जारी रहने से यूरोप व अमरीका समेत पूरे संसार में उसके विरुद्ध घृणा पैदा हो रही है। उसकी इस नीति के चलते ज़ायोनी शासन के पारंपरिक घटक भी उसके विरुद्ध कुछ प्रतिबंध लगाने पर विवश हो गए हैं। एेसा प्रतीत होता है कि ज़ायोनी शासन को इसके बाद संसार के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक, वित्तीय व सांस्कृतिक बहिष्कार समेत विभिन्न प्रकार की कार्यवाहियों का सामना करना पड़ेगा। (HN)