अस्ताना वार्ता, सीरिया संकट के समाधान में मील का पत्थर
क़ज़ाख़िस्तान की राजधानी अस्ताना में सोमवार और मंगलवार को ईरान, रूस और तुर्की की पहल पर सीरिया वार्ता हो रही है।
अस्ताना वार्ता पहली ऐसी वार्ता है, जो क्षेत्रीय देशों की पहल पर हो रही है और इसमें यूरोपीय एवं अमरीका की कोई सीधी भूमिका नहीं है। इस बीच, राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद द्वारा सीरिया वार्ता के समर्थन से क़रीब पिछले 6 वर्षों से जारी दुनिया के सबसे बड़े संकटों में से एक के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आशा जगी है।
इस वार्ता में फ़्री सीरियन आर्मी के नेतृत्व में 14 सशस्त्र गुट भाग ले रहे हैं। सीरिया में आतंकवादी गुटों के क़ब्ज़े से हलब की आज़ादी से ज़मीनी स्थिति में काफ़ी बदलाव आया है। उसके बाद, ईरान, रूस और तुर्की के प्रयासों से युद्ध विराम का लागू होना और अस्ताना वार्ता के लिए सहमति इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए महत्वपूर्ण सफलताएं हैं।
सीरिया में प्रतिरोध की सफलता और आतंकवादी गुटों की पराजय ने अस्ताना वार्ता में उन्हें कमज़ोर स्थिति में ला खड़ा किया है, इसीलिए वे अब एकपक्षीय मांगों को मनवाने पर आग्रह नहीं कर सकते, जैसा कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने जेनेवा वार्ता में किया था, जिसके कारण वह परिणामहीन रही थी।
सीरिया की वास्तविक स्थिति को समझना, इस देश की संप्रभुता का पूर्ण सम्मान और देश के भविष्य निर्धारण में जनता की इच्छाओं का सम्मान, सीरिया संकट के समाधान के लिए तार्किक प्रस्ताव है।
सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद के अनुसार, बैलेट बॉक्स से उनका राजनीतिक भविष्य निर्धारित होगा, न कि अस्ताना या कहीं भी होने वाली वार्ता की मेज़ पर, इसलिए कि सीरिया के संविधान के अनुसार, इस देश की जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव करती है।