क्या दुनिया का नेतृत्व चीन को सौंप रहा है अमरीका?
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चीन आर्थिक क्षेत्र ही नहीं राजनैतिक और सामरिक क्षेत्र में भी सुपर पावर बनने की डगर पर तेज़ी से बढ़ता दिखाई दे रहा है और इस स्थिति का बहुत बड़ा श्रेय अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जाता है क्योंकि ट्रंप ने शासन संभालने के बाद आनन फ़ानन में जो फ़ैसले किए हैं वह ख़ुद को अलग थलग करने वाली नीतियां हैं जबकि दूसरी ओर अमरीका में अस्थिरता की स्थिति फैलती जा रही है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २६, २०१७ १६:२२ Asia/Kolkata
  • क्या दुनिया का नेतृत्व चीन को सौंप रहा है अमरीका?

चीन आर्थिक क्षेत्र ही नहीं राजनैतिक और सामरिक क्षेत्र में भी सुपर पावर बनने की डगर पर तेज़ी से बढ़ता दिखाई दे रहा है और इस स्थिति का बहुत बड़ा श्रेय अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जाता है क्योंकि ट्रंप ने शासन संभालने के बाद आनन फ़ानन में जो फ़ैसले किए हैं वह ख़ुद को अलग थलग करने वाली नीतियां हैं जबकि दूसरी ओर अमरीका में अस्थिरता की स्थिति फैलती जा रही है।

कुछ ही दिन पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग स्वीज़रलैंड में डावोस आर्थिक फ़ोरम के मुख्य अतिथि बने जहां उन्होंने पुरज़ोर तरीक़े से भूमंडलीकरण की वकालत की तथा विश्व स्तर पर चीन की अधिक व्यापक भूमिका की बात की, मानो वो ट्रंप के अमरीका फ़्रस्ट के नारे का परोक्ष रूप से जवाब दे रहे थे।

रिटायर्ड चीनी जनरल लू यूवान ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए लिखा कि आपके पास नारा है अमरीका फ़्रस्ट और हमारा नारा है संयुक्त मानव समाज, अर्थात आपने ख़ुद को अलग थलग कर लेने का फ़ैसला किया है और हमने दरवाज़े खोलने का मन बनाया है। यहीं से हमारे और आपके बीच भारी अंतर का पता चलता है।

आगामी मई महीने में चीन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेज़बानी करेगा जिसमें चीन की उस पहल की झलक सामने आ सकती है जो कहती है कि एक पट्टी एक रास्ता। यह पहल वास्तव में मूल प्रतिष्ठानों और निवेश पर केन्द्रित है और इससे चीनी वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।

सटीक विकास योजना को लागू करने के बाद चीन ने आर्थिक क्षेत्र में चमत्कार किया। यह योजना ख़र्चों को समेटने, कार्य के मूल्यों को बढ़ावा देने, जनसंख्या विस्फोट पर क़ाबू पाने और भ्रष्टाचारियों के ख़िलाफ़ बेदर्दी से कार्यवाही करने पर आधारित थी। जब चीन अपनी नींद से जागा और दुनिया की पहली आर्थिक शक्ति बनने के क़रीब पहुंच गया तो उसने धीरे धीरे कठोर आर्थिक नीतियों में ढील दी और अपने नागरिकों को अधिक सुविधाएं देने की दिशा में क़दम बढ़ाए साथ ही जनसंख्या कंट्रोल की नीति में भी नर्मी कर दी। चीन ने अपनी नई नीति के तहत विश्व स्तर पर राजनैतक और सामरिक मैदानों में भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं। चीन ने अपने दरवाज़े विदेशियों के लिए खोले जिसके बाद चीनी रेस्तोरानों की जगह इतालवी और फ़्रांसीसी रेस्तोरानों की भरमार हो गई।

सिल्क रोड जो चीन से शुरू होकर यूरोप और अमरीका तक पहुंचता है, उसे फिर से बहाल किए जाने की बातें गंभीर चरण में पहुंच चुकी हैं। चीन ने सुरक्षा परिषद में सीरिया में अमरीका के सैनिक हस्तक्षेप के प्रस्ताव को कई बार वीटो किया तो शायद इसका संबंध ही सिल्क रोड की नीति से हो।

ट्रंप ने वाइट हाउस में क़दम रखते ही ट्रांस पेसिफ़िक पार्टनरशिप समझौते से अमरीका को अलग कर लिया तो शायद यह जगह अब चीन ले लेगा।

चीन के विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विभाग के प्रमुख जांग जू ने चीन के हालिया उत्थान को बड़े संक्षेप में बयान किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई यह कहता है कि चीन दुनिया में अगुवा की भूमिका अदा करेगा तो मैं यह कहता हूं कि चीन नेतृत्व की कुर्सी की ओर नहीं बढ़ रहा है बल्कि जो नेतृत्व की कुर्सी पर हैं वह ख़ुद पीछे हट रहे हैं और इस स्थान को ख़ाली कर रहे हैं।

अब शायद बहुत तेज़ी से अरब देश पूरब की ओर दौड़ लगाएंगे जहां नया विश्व नेतृत्व है। अब पश्चिम और अमरीका पर भरोसा करने का ज़माना बीत चुका है।

 

 

साभार रायुल यौम