अमरीकी रक्षा मंत्री का जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा
अमरीकी रक्षा मंत्री का जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा
नए अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्ज़ मैटिस अपने पहले विदेशी दौरे पर जापान और दक्षिण कोरिया गए और इन देशों के अधिकारियों से मुलाक़ात में एक बार फिर वॉशिंग्टन की ओर से सियोल और टोक्यो का समर्थन जारी रहने पर बल दिया।
मैटिस का पूर्वी एशिया को अपने पहले दौरे के लिए चुनना यह दर्शाता है कि वॉशिंग्टन की क्षेत्रीय नीति में एशिया की क्या अहमियत है। यद्यपि अमरीका ने पूर्वी एशिया में अपनी सैन्य स्ट्रैटिजी का लक्ष्य अपने घटक अर्थात जापान और दक्षिण कोरिया का समर्थन एलान किया है लेकिन इस बात में शक नहीं कि अमरीका का अस्ल लक्ष्य चीन को लगाम लगाना है। जैसा कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने चुनावी अभियान के दौरान चीन को अमरीका के लिए समस्याजनक कहा था। इसलिए जेम्स मैटिस के दक्षिण कोरिया और जापान के सफ़र ने यह दर्शा दिया कि अमरीका क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति मज़बूत करने के चक्कर में है। मैटिस का दक्षिण कोरिया में इस साल के अंत तक थाड मीज़ाईल प्रणाली तैनात करने का समर्थन करना इसी दृष्टि से समीक्षा योग्य है।
इस बीच जापान में राष्ट्रवादी रुझान रखने वाले राष्ट्रीय संप्रभुता व स्वाधीनता बल देते हुए ट्रम्प के उस बयान को जापानी जनता की एक प्रकार की बेइज़्ज़ती की संज्ञा दे रहे हैं जिसमें ट्रम्प ने यह कहा था कि जापान इस देश में अमरीकी सैनिकों की तैनाती का ख़र्चा और उठाए। जापान में राष्ट्रवादी रुझान रखने वाले चाहते हैं कि यह देश अमरीका के साथ सुरक्षा समझौते से बाहर निकल आए और अपनी सुरक्षा ख़ुद करे।
उधर दक्षिण कोरिया की जनता भी इस देश में अमरीका की ओर से थाड मीज़ाईल प्रणानी लगाए जाने की विरोधी है और इसे दक्षिण कोरिया के और अलग थलग पड़ने का कारण समझती है क्योंकि चीन ने इस मीज़ाईल प्रणाली की तैनाती का विरोध किया है और इसकी तैनाती के अंजाम की ओर से सियोल को चेतावनी भी दी है। (MAQ/T)