शरणार्थियों के संबंध में जर्मनी के सुर में भी आया बदलाव
सीमाओं पर रुकावट उत्पन्न करना ग़ैर कानूनी पलायनकर्ताओं से मुकाबले का प्रभावी मार्ग है। जर्मन गृहमंत्री
जर्मनी ने भी शरणार्थियों पर दबाव में वृद्धि किये जाने का समर्थन किया है। जर्मनी के गृहमंत्री थॉमस डे मेज़ियर ने शरणार्थियों पर दबाव में वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में यूरोपीय देशों की सीमाओं पर रुकावट उत्पन्न करने का समर्थन किया है।
साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों का आह्वान किया है कि वे सीमाओं के नियंत्रण में वृद्धि करें। उन्होंने इस संबंध में कहा कि सीमाओं पर रुकावट उत्पन्न करना ग़ैर कानूनी शरणार्थियों से मुकाबले का प्रभावी मार्ग है।
इस प्रकार हंगरी के बाद जर्मनी दूसरा यूरोपीय देश है जो शरणार्थियों के प्रवेश को रोकने के लिए सीमाओं पर रुकावट उत्पन्न किये जाने का समर्थन कर रहा है।
इसी बीच जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल ने उत्तरी अफ्रीका की अपनी हालिया यात्रा में मिस्र, टयूनेशिया और लीबिया जैसे देशों में शरणार्थियों के लिए कैंप बनाये जाने का सुझाव पेश किया और कहा कि उसमें सीरिया और लीबिया से यूरोप जाने वाले शरणार्थी जमा हों और अपने देशों की स्थिति के बेहतर होने तक वहीं रहें।
जर्मनी के गृहमंत्री ने पलायनकर्ताओं को रोकने के लिए यूरोपीय देशों की सीमाओं पर रुकावट उत्पन्न करने का जो सुझाव दिया है वास्तव में जर्मनी दूसरे यूरोपीय देशों के साथ पलायनकर्ताओं के विरुद्ध नीतियों को कठोर बनाये जाने का पक्षधर है।
यूरोप में पलायन संकट आरंभ होने के समय जर्मनी की सरकार ने खुले दिल से पलायनकर्ताओं को स्वीकार किया परंतु इस देश में लाखों शरणार्थियों के आ जाने के बाद बर्लिन सरकार को आंतरिक विरोधों का सामना करना पड़ा और यूरोपीय देशों में बहुत से हल्कों ने जर्मन चांसलर के उस सुझाव की आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि शरणार्थियों को यूरोपीय देशों में बांट दिया जाना चाहिये।
इस परिस्थिति में जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल ने अफ्रीकी देशों में शरणार्थी कैंप बनाये जाने का जो सुझाव दिया है प्रतीत यह हो रहा है कि उसका लक्ष्य आंतरिक दबाव को कम करना है। MM