इक्वाडोर ने की अमरीका की मानवाधिकार की रिपोर्ट की कड़ी निंदा
इक्वाडोर ने की अमरीका की मानवाधिकार की रिपोर्ट की कड़ी निंदा
इक्वाडोर के विदेश मंत्री ग्यूमे लॉन्ग ने देश में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में अमरीकी रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा कि अमरीका के पास अन्य देशों की समीक्षा करने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि बहुत से अवसर पर ख़ुद अमरीका ने मानवाधिकार का उल्लंघन किया है और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति उसने बहुत कम प्रतिबद्धता दिखायी है।
इक्वाडोर की ओर से अमरीकी विदेश मंत्रालय की उस रिपोर्ट की कड़ी आलोचना कि जिसमें अन्य देशों में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में राय क़ायम की गयी है, यह दर्शाती है बहुत से देश वॉशिंग्टन के इस क़दम के बहुत ख़िलाफ़ हैं।
सवाल यह पैदा होता है कि किस अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने अमरीकी सरकार को यह अधिकार दिया है कि वह दूसरे देशों में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में जांच करे और वार्षिक रिपोर्ट पेश करे?
यूं तो अमरीका हमेशा मानवाधिकार की रक्षा का दम भरता है लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में उसे मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता देश माना जाता है। अमरीका में 10 लाख से ज़्यादा क़ैदी हैं, जिसमें अश्वेत और लैटिन अमरीकी मूल के क़ैदियों के साथ बहुत ही भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है।
अमरीका में मानवाधिकार के उल्लंघन की सबसे बड़ी मिसाल इस देश में अश्वेत लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार है। अमरीका में अश्वेत लोगों के साथ नस्लभेदी व्यवहार, शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक स्तर पर उनके साथ भेदभाव एक आम बात बन चुकी है। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के आधिकारिक आदेश के तहत, नई अमरीकी सरकार की ग़ैर क़ानूनी पलायकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उन्हें बाहर निकालना भी मानवाधिकार के खुले उल्लंघन में शामिल है। इसी विषय ने इस बात के मद्देनज़र कि अमरीका में ज़्यादातर ग़ैर क़ानूनी अप्रवासी लैटिन मूल के हैं, लैटिन अमरीकी देशों के क्रोध को भड़का दिया है। (MAQ/T)