अमेरिका और ब्रिटेन ने मुसलमानों के विरुद्ध नई सीमाएं उत्पन्न कीं
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अमेरिका और ब्रिटेन की यात्रा करने वाले कुछ इस्लामी देशों के नागरिक अपने साथ लेपटाप और टेबलेट भी नहीं ले जा सकेंगे
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar २२, २०१७ १५:३० Asia/Kolkata

अमेरिका और ब्रिटेन की यात्रा करने वाले कुछ इस्लामी देशों के नागरिक अपने साथ लेपटाप और टेबलेट भी नहीं ले जा सकेंगे

अमेरिकी सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसके अनुसार जार्डन, मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब, कुवैत, मोरक्को, कतर और संयुक्त अरब इमारात से अमेरिका जाने वाले लोग स्मार्ट फोन से बड़ी कोई इलक्ट्रांनिक की चीज़ नहीं ले जा सकते।

ब्रिटेन की सरकार ने भी इसी प्रकार का एक आदेश जारी किया है और 6 इस्लामी देशों जार्डन, मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब, लेबनान और ट्यूनीशिया के नागरिकों का आह्वान किया है कि वे अपने साथ लेपटाप, टैबलेट और बड़ा मोबाइल टेलीफोन विमान में लाने से बचें।

अमेरिका और ब्रिटेन ने जिन इस्लामी देशों के नागरिकों के लिए सीमाएं उत्पन्न की हैं वास्तव में उनके इस कार्य का लक्ष्य मुसलमानों को इन देशों की यात्रा करने या उनमें रहने से रोकना है। इस कार्य का बहाना पहले वाले कदम की भांति आतंकवादी खतरे से मुकाबला बताया गया है।

जैसाकि एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया था कि प्राप्त सुरक्षा जानकारियों के आधार पर आतंकवादियों का एक मुख्य लक्ष्य यात्री विमानों को निशाना बनाना है। ब्रिटेन की सरकार भी इस संबंध में पूरी तरह अमेरिका का अनुसरण कर रही है।

इन सबके बावजूद अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से इस प्रकार की कार्यवाहियों को इन देशों की यात्रा पर जाने वाले मुसलमानों के विरुद्ध भेदभाव की कार्यवाहियां समझी जा रही हैं। यही नहीं इस प्रकार की कार्यवाहियां पश्चिमी देशों के नागरिकों में मुसलमानों से और भय फैलने का कारण बनेंगी।

वास्तव में अमेरिका और ब्रिटेन की सरकार ने जो यह निर्णय लिया है उससे वे आम जनमत विशेषकर इन देशों के नागरिकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि मुसलमान खतरनाक होते हैं और उनसे मुकाबले के लिए सुरक्षा नीतियां अपनायी जानी चाहिये जबकि इस प्रकार का विचार वास्तविकता से बहुत दूर है और इस संबंध में यह पहली कार्यवाही नहीं है।

यहां इस बिन्दु का उल्लेख आवश्यक है कि केवल मुट्टी भर मुसलमान अतिवादी हैं और अधिकांश मुसलमान हिंसा और अतिवाद के मुखर विरोधी हैं और मुट्टी भर अतिवादियों के कारण समस्त मुसलमानों को खतरा बताना न्याय संगत नहीं है और अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से मुसलमानों के विरुद्ध लगायी जाने वाली नयी सीमाएं वास्तव में सामूहिक दंड है जो न्याय के विरुद्ध और भेदभाव का स्पष्ट उदाहरण है। MM