मिस्र का रक्तरंजित दिन
मिस्र में चार आतंकवादी धमाकों में दसियों लोग हताहत व घायल हो गये। इन धमाके के बाद मिस्र की सरकार ने तीन दिनों के आम शोक की घोषणा की और मिस्र के राष्ट्रपति ने देश के समस्त प्रांतों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
मिस्र के शहर तंता में पाम संडे के अवसर पर दो कॉप्टिक चर्चों में होने वाले बम धमाकों के परिणाम में 45 लोग हताहत और 100 से अधिक घायल हो गये।
क़ाहिरा में सरकारी सूत्रों ने बतायाकि एक धमाका नील नदी के निकट स्थित तंता शहर के सेन्ट जार्ज गिरजाघर में हुआ जिसके परिणाम में 27 लोग हताहत और 78 घायल हो गये। इसके कुछ घंटे बाद इस शहर के एक पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र पर दूसरा धमाका हुआ जबकि तीसरा धमाका इस्कंदरिया शहर के एक गिरजाघर में हुआ जिसमें तीन पुलिसकर्मियों सहित सोलह लोग हताहत और 41 घायल हो गये। चौथा धमाका सीना प्रांत के तलूल क्षेत्र में एक पुलिस वैन को निशान बनाकर किया गया। बताया जाता है कि इन धमाकों में कुल मिलाकर 140 से अधिक लोग हताहत व घायल हुए हैं। इस प्रकार से कॉप्टिक ईसाइयों का त्योहरा, एक काला दिवस में परिवर्तित हो गया।
मिस्री सूत्रों ने अनुसार यह हमला था जिसमें कॉप्टिक पोप की एेतिहासिक बैठक को निशाना बनाया गया था। यह धमाके ईसाइयों के विशेष त्योहरा पाम संडे के अवसर पर हुए। पाम संडे इसाईयों के पवित्र दिनों में से एक है जिसको वह हज़रत ईसा को यूरेशलम में विजयी के रूप में प्रविष्ट होने के उपलक्ष्य में मनाते हैं। आतंकवादी गुट दाइश ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली। मिस्र और रूस के राष्ट्रपतियों तथा पाप फ़्रांसिस द्वितीय ने गिरजाघरों पर हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
वर्ष 2011 में मिस्र में जनक्रांति के बाद, यद्यपि कुछ समय तक देश में राजनैतिक अशांति और आर्थिक समस्या रही किन्तु पिछले दिनों मिस्र के चर्च में होने वाला आतंकवादी हमला बहुत ख़तरनाक निशानी हे।
मिस्र में 10 से 15 प्रतिशत के बीच ईसाइ रहते हैं और यह इस देश के महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समझे जाते हैं और कभी भी एेसा इस देश में मुसलमानों और ईसाइयों के बीच कोई मतभेद या लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ किन्तु मध्यपूर्व में दाइश के विस्तार से मिस्र के ईसाइयों के लिए भी ख़तरे पैदा हो गये हैं। (AK)