अमेरिका दाइश विरोधी लड़ाई को लंबा करने की जुगत में है
अमेरिका विमानों से आतंकवादी गुट दाइश के लिए सहायता गिराकर इस युद्ध को लंबा खिंचने की चेष्टा में हैं
इराक की राजनीतिक पार्टियों और गुटों के नेताओं ने आतंकवाद से मुकाबले की दिशा में अमेरिका द्वारा उत्पन्न की जा रही बाधाओं के संबंध में चेतावनी दी है।
इस संबंध में इराक की महिला सांसद फिरदौस अलअवादी ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि अमेरिकी सैनिक कभी दाइश से मुकाबले के बहाने आम इराकी नागरिकों को लक्ष्य बनाते हैं यहां तक कि वे विमानों से आतंकवादी गुट दाइश के लिए सहायता गिराकर इस युद्ध को लंबा खिंचने की चेष्टा में हैं।
इसी प्रकार इराक के स्वयं सेवी बल से संबंधित “असाएबे अहले हक” नामक गुट के प्रवक्ता ने भी कहा है कि नैनवां प्रांत में तअलफर नगर के पूर्ण परिवेष्टन के बाद अमेरिकी सैनिक इस नगर में दाइश की सहायता करके इराकियों से इस गुट की लड़ाई को लंबा करने की चेष्टा में हैं।
प्रश्न यह है कि अमेरिकी सरकार इराक में दाइश के विरुद्ध होने वाली लड़ाई को क्यों समाप्त नहीं होने देना चाहती है? और इस युद्ध को लंबा करने के पीछे उसका क्या लक्ष्य है?
अमेरिका का नाम दाइश से मुकाबले का नारा लगाने वाले सबसे महत्वपूर्ण देश के रूप में लिया जा सकता है। यह ऐसी स्थिति में है जब विभिन्न प्रमाण मौजूद हैं और उनसे यह सिद्ध होता है कि दाइश सहित कुछ आतंकवादी गुटों का जनक अमेरिका है।
अमेरिका की पूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन ने “हार्ड चव्वाइज़” नामक अपनी किताब में स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया है कि हम लोगों ने ही दाइश को बनाया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान बारमबार हिलैरी क्लिंटन और बराक ओबामा पर आरोप लगाया था कि दाइश को बनाने में इन लोगों की सीधी भूमिका है।
वास्तव में अमेरिका मध्य पूर्व की शांति व सुरक्षा को अपने हितों के अनुरुप नहीं समझता है। अलबत्ता मध्यपूर्व की स्थिति के अशांत रहने की स्थिति में ही इस्राईली हितों की अच्छी तरह से पूर्ति होती है।
बहरहाल इस समय इराक में आतंकवाद से मुकाबले की लड़ाई अंतिम चरण में है और अमेरिका इस संबंध में विघ्न उत्पन्न कर रहा है क्योंकि ट्रंप सरकार इराक में दाइश के विरुद्ध होने वाली लड़ाई को जल्द समाप्त होने से रोकना चाहती है ताकि दाइश के बाद इराक में अपने कार्यक्रमों को लागू करने के लिए उसे अधिक अवसर मिल सके। MM