राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले पेरिस में आतंकी हमला,
https://parstoday.ir/hi/news/world-i40424-राष्ट्रपति_चुनाव_से_ठीक_पहले_पेरिस_में_आतंकी_हमला
फ़्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाली फ़ायरिंग में एक पुलिस अफ़सर मारा गया और तीन लोग घायल हो गए इसके बाद फ़्रांस की सरकार ने अपात बैठक की। आतंकी संगठन दाइश ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २१, २०१७ १६:२० Asia/Kolkata

फ़्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाली फ़ायरिंग में एक पुलिस अफ़सर मारा गया और तीन लोग घायल हो गए इसके बाद फ़्रांस की सरकार ने अपात बैठक की। आतंकी संगठन दाइश ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की।

पुलिस के अनुसार एक हमलावर मारा गया है जिसकी उम्र 39 साल है और वह फ़्रांस का नागरिक था।

पेरिस में होने वाले आतंकी हमले की ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कठोर शब्दों में निंदा की। मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय ने भी आतंकी हमले की आलोचना में बयान जारी किया है।

आतंकी हमले से फ़्रांस की जनता और विशेष रूप से पेरिस के लोगों में एक बार फिर आतंक फैल गया है। हालिया कुछ वर्षों में फ़्रांस में कई आतंकी हमले हुए हैं। वर्ष 2015 में जनवरी और नवम्बर के महीनों में बड़े आतंकी हमले हुए, जुलाई 2016 में भी आतंकी हमले में कई लोगों की जानें चली गईं।

इस समय आतंकवाद और मुख्य रूप से दाइश संगठन यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सीरिया और इराक़ में आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग लेने वाले यूरोपीय देशों के नागरिकों की अपने देश वापसी वास्तव में यूरोप के लिए गहरी चिंता का विषय है।

यहां सबसे विचित्र बात यह है कि फ़्रांस तथा अन्य यूरोपीय देश दाइश की गतिविधियों और आतंकी हमलों से चिंतित तो हैं लेकिन इन्हीं देशों ने दाइश और अन्नुस्रा फ़्रंट के गठन में प्रभावी भूमिका निभाई है और इस समय भी इन आतंकियों की वे प्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहे हैं या सऊदी अरब और क़तर जैसे देशों को ढील देकर आतंकियों तक मदद पहुंचवा रहे हैं।

यही कारण है कि सीरिया और इराक़ में अशांति है और सीरिया के कुछ भागों में अब भी आतंकी संगठन अपनी गतिविधियां कर रहे हैं जिसके नतीजे में शरणार्थियों की लहर तुर्की तथा अन्य देशों के माध्यम से यूरोप पहुंचने का प्रयास कर रही है।

फ्रांस में आगामी 23 अप्रैल को राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं अतः इस समय होने वाले आतंकी हमले का देश के वातावरण पर गहरा असर पड़ना निश्चित है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ़्रांसवा फ़्यून ने तो चुनाव स्थगित कर देने की मांग की है लेकिन सरकार चाहती है कि चुनाव समय पर हो जाएं ताकि यह संदेश जाए कि फ़्रांस मज़बूती से आतंकवाद का मुक़ाबला करने में सक्षम है। चरमपंथी मानी जाने वाली उम्मीदवार मारियन लूपेन के बारे में कहा जाता है वह इस हमले का चुनाव प्रचार में जमकर प्रयोग भी करेंगी।