इस्राईल को क्यों है इमाम महदी (अ) की तलाश? (दूसरा भाग)
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अमरीका महाद्वीप में बाइबल क्रिस्चयन बेल्ट के ज़ायोनियों से गहरे संबंध रहे हैं। इसी लिए जब ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजा से अपनी यादगार मुलाक़ात के बाद वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने जो कैथोलिक ईसाई थे बड़ा निर्णायक भाषण दिया और उसमें कहा कि हम असली ईसाइयों की आस्था यह है कि यरूश्लम या बैतुल मुक़द्दस बहुत पवित्र स्थल है और हज़रत ईसा मसीह हज़रत महदी के साथ आएंगे तब पूरी दुनिया में शांति स्थापित होगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १५, २०१७ १२:४२ Asia/Kolkata
  • इस्राईल को क्यों है इमाम महदी (अ) की तलाश? (दूसरा भाग)

अमरीका महाद्वीप में बाइबल क्रिस्चयन बेल्ट के ज़ायोनियों से गहरे संबंध रहे हैं। इसी लिए जब ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजा से अपनी यादगार मुलाक़ात के बाद वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने जो कैथोलिक ईसाई थे बड़ा निर्णायक भाषण दिया और उसमें कहा कि हम असली ईसाइयों की आस्था यह है कि यरूश्लम या बैतुल मुक़द्दस बहुत पवित्र स्थल है और हज़रत ईसा मसीह हज़रत महदी के साथ आएंगे तब पूरी दुनिया में शांति स्थापित होगी।

चावेज़ ने इस तथ्य की ओर से इशारा किया कि मुसलमान और ईसाई बुराई से लड़ने के लिए एक हो जाएंगे और ज़ायोनियों को यही पसंद नहीं है। क्योंकि उन्होंने इस्लामोफ़ोबिया पर काम करने वाले थिंक टैंकों पर अरबों डालर ख़र्च किए हैं और मीडिया के माध्यम से मुसलमानों को हाशिए पर डालने बड़ी कोशिशें की हैं।

वर्ष 2009 में जो साक्षात्कार एन करी ने एनबीसी के लिए ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद से किया उसे इस लिए प्रसारित नहीं किया गया कि इमाम महदी के बारे में सवाल का जो जवाब उन्होंने दिया वह चैनल के अधिकारियों की मर्ज़ी के अनुरूप नहीं था अतः उन्होंने यह नहीं कहा कि इमाम महदी के आगमन के साथ ही दुनिया का अंत हो जाएगा।

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने पत्रकार को टोकते हुए कहा कि जो कुछ विश्व संग्राम और संसार के अंत के बारे में कहा जा रहा है वह सब ज़योनियों के दावे हैं। इमाम महदी अलैहिस्सलाम तो तर्क, विवेक, संस्कृति और ज्ञान लेकर आएंगे। वह इस लिए आएंगे कि युद्ध न हो, दुशमनी बाक़ी न रहे, नफ़रत न रहे, कोई टकराव न रहे। वह हज़रत ईसा मसीह के साथ लौटेंगे। दोनों एक साथ आएंगे। दोनों मिलकर काम करेंगे और दुनिया को प्यार से भर देंगे।

 

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इस्राईल यह कभी नहीं चाहता कि ईसाई मत जाग जाएं और यह समझ लें कि उनका असली दुशमन इस्लाम नहीं ज़ायोनी हैं।

यह एक सच्चाई है कि ईरान जैसा कि आईएईए ने भी माना है, परमाणु बम नहीं बना रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस्राईल की कोशिश है कि ईरान के विरुद्ध युद्ध हो जाए। इसकी वजह शायद यह है कि इमाम महदी को मानने वाले शीया समुदाय के लोगों की बहुत बड़ी आबादी ईरान और ख़ुरासान में बसती है।

ख़ुरासान वैसे तो ईरान का पूर्वोत्तरी प्रांत है लेकिन प्राचीन ख़ुरासन में मध्य एशिया और अफ़ग़ानिस्तान के भी कुछ भाग शामिल हैं।

अमरीका और इस्राईल ने जहां भी युद्ध किया है वहां उन्होंने वाइट फ़ासफ़ोरस युक्त बमों का प्रयोग किया है और इससे यह साबित होता है कि वह लोकतंत्र की स्थापना में कोई रूचि नहीं रखते बल्कि वह इस बात को सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इन क्षेत्रों में भविष्य की नस्लें प्रतिरोध आंदोलन शुरू न कर सें।

इराक़ पर अमरीका के हमले के दस साल बाद डाक्टरों को साफ़ तौर पर नज़र आने लगा कि वहां डिप्लेटेड युरेनियम के प्रयोग के नतीजे में कैंसर की दर बहुत बढ़ गई है और अपंग बच्चे पैदा हो रहे हैं। फ़ल्लूजा नगर में तो अपंग बच्चों की पैदाइश दर हीरोशीमा और नागासाकी से भी बढ़ गई है।

अफ़ग़ान सेना के दस्तवेज़ जो दानिश नामक अख़बार ने लीक किए उनसे पता चलता है कि अफ़ग़ानिस्तान के आवासीय क्षेत्रों में भी अमरीका ने फ़ासफ़ोरस युक्त बम और राकेट प्रयोग किए हैं।

जिन इस्लामी हदीसों में इमाम महदी के आगमन की बात कही गई है उनमें यह भी कहा गया है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम काले झंडे लेकर आगे बढ़ने वाली सेना का नेतृत्व करेंगे जबकि कुछ अरब सरकारें इस सेना के मुक़ाबले में विद्रोहियों का समर्थन करेंगी।  

इमाम महदी अलैहिस्सलाम के साथ जो लोग होंगे उनके बारे में भी बता दिया गया है। लेबनान के संगठन हिज़्बुल्लाह ने परमाणु हथियारों से लैस इस्राईल को पराजित कर दिया। हिज़्बुल्लाह के संघर्षकर्ताओं के पास शायद इस्राईली सेना जितने हथियार नहीं थे लेकिन उनके भीतर जज़्बा तो वही था जिस जज़्बे की मदद से हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ख़ैबर में यहूदियों के दुर्ग का दरवाज़ा उखाड़ लिया था। यही जज़्बा कर्लबा में इमाम हुसैन ने दिखाया।

यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि एक हज़ार साल से अधिक समय पहले यह बता दिया जाए कि बहुत से अरब, विद्रोहियों के साथ मिलकर इमाम महदी अलैहिस्सलाम की सेना का मुक़ाबला करेंगे। यह अरब कौन हैं? इस समय तो हम इस्राईल के सऊदी अरब तथा फ़ार्स खाड़ी के अन्य अरब शासकों को गठजोड़ देख रहे हैं और इसका नतीजा सीरिया युद्ध के अलावा तो कुछ नहीं देखने में आया है।

इस्राईल वास्तव में सीरिया और ईरान के विरुद्ध युद्ध की आग में तेल डाल रहा है जबकि दूसरी ओर सऊदी अरब और क़तर बड़े पैमाने पर सीरिया में हथियार और पैसा भेज रहे हैं जो चरमपंथियों को मिल रहे हैं और इन चरमपंथियों का एजेंडा शीयों का सफ़ाया करना है।

वरिष्ठ पत्रकार सीमूर हर्श न्यूयार्कर में अपने लेख मे बताते हैं कि किस तरह बुश प्रशासन ने ईरान और हिज़्बुल्लाह को कमज़ोर करने पर कितना ध्यान दिया और इसके लिए सऊदी अरब के साथ मिलकर चरमपंथी संगठनों की मदद की।

न्यू वर्ल्ड आर्डर के तहत मुसलमानों में ख़ूंख़ार फ़ोर्सेज़ पैदा हुई हैं जो इस्राईल से मैत्रीपूर्ण संबंध रखती हैं। एसी फ़ोर्सेज़ जो यह समझती हैं कि महिला से बलात्कार कोई बड़ी बात नहीं है और जो यू ट्यूब पर सिर कटी लाशे दिखाने में गर्व महसूस करती हैं। इस्लाम का यह असहिष्णु रूप ब्रिटेश एजेंट अब्दुल वह्हाब द्वारा तैयार किया गया और सऊदी अरब ने इसका जमकर प्रचार प्रसार किया। इस विचारधारा के तहत शीया समुदाय को इस्राईल से बड़ा दुशमन बताया जाता है।

फ़्री सीरियन आर्मी के एक नेता अब्दुल्लाह तमीमी ने इस्राईल से अनुरोध किया है कि वह मदद करके सुन्नी शासन का गठन करवाए तातकि शीयों, ईसाइयों और दुरूज़ का दमन किया जाए। उन्होंने कहा कि इस्राईल हमारा दुशमन नहीं है, हम चाहते हैं कि इस्राईल हमारी मदद करे।

सऊदी अरब और इस्राईल की ओर से पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ जैसे देशों में सांप्रदायिक टकराव को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग की जा रही है और शीयों की हत्याओं की दरें बढ़ती जा रही हैं। विकीलीक्स ने भी इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह सऊदी अरब दसियों लाख डालर की रक़म इस उद्देश्य से ख़र्च कर रहा है।

पाकिस्तान में शीया समुदाय के लोगों की हत्याओं की दरें बहुत बढ़ी हुई हैं और इस समय शीया समुदाय के साथ ही सुन्नी समुदाय के लोग भी मिकलर इस साज़िश को नाकाम बनाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिर भविष्य बहुत रक्तरंजित दिखाई दे रहा है क्योंकि नवाज़ शरीफ़ की सरकार सऊदी अरब के समर्थन से बनी थी और नवाज़ शासन में सऊदी अरब को वही सब कुछ करने का मौक़ा मिल गया है जो उसने अफ़ग़ानिस्तान में किया यानी सऊदी अरब से फंड पाने वाले मदरसों में चरमपंथियों को प्रशिक्षण देकर तालेबान संगठन बनवा दिया। या सीरिया में तकफ़ीरियों को इसी तरह तैयार किया गया है।

यह एक सच्चाई है कि अमरीका की मदद से इस्राईल इमाम महदी अलैहिस्सलाम को खोज निकालने की योजना पर काम कर रहा है। इससे किसी को भी यह विश्वास हो सकता है कि बाइबल में बयान की गई कहानी में सच्चाई है। एसी दुनिया में जहां हम सुपर हीरो की फ़िल्में देख रहे हैं, यह कहीं से भी तर्कहीन नहीं है कि एसी सेना की प्रतीक्षा की जाए जो ख़ुरासान से निकले और उसके पास काला झंडा हो और जो अन्याय से युद्ध करे।     

यह लेख शबाना सैयद ने वेटरन्स टुडे के लिए लिखा है।