जी-7 ग़ैर ज़िम्मेदाराना दृष्टिकोण पेश करने से दूर रहेः चीन
जी- 7 के सदस्य देशों को चाहिये कि वे मतभेदों के समाधान में क्षेत्रीय देशों के प्रयासों का सम्मान करें।
चीनी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने जी-7 की विज्ञप्ति की प्रतिक्रिया में कहा है कि इस गुट को चाहिये कि वह चीनी समुद्र से संबंधित मामलों के बारे में ग़ैर ज़िम्मेदाराना दृष्टिकोण पेश करने से दूर रहे।
चीनी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग के कथनानुसार चीन का मानना है कि मतभेदों का समाधान समस्त देशों से वार्ता द्वारा हो सकता है और बीजींग दक्षिणी व पूर्वी चीन सागर में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के प्रति कटिबद्ध है और जी- 7 के सदस्य देशों को चाहिये कि वे मतभेदों के समाधान में क्षेत्रीय देशों के प्रयासों का सम्मान करें।
जी-7 के सदस्य देशों के नेताओं ने इटली में अपनी बैठक की समाप्ति पर जारी होने वाली विज्ञप्ति में पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर की स्थिति पर चिंता जताई थी और विवादास्पद क्षेत्र के असैन्य क्षेत्र बनाये जाने की मांग की थी।
इसका अर्थ यह है कि जी-7 का मानना है कि चीन दक्षिणी और पूर्वी सागर सागर क्षेत्र का सैन्यकरण कर रहा है। यह ऐसी स्थिति में है जबकि बींजीग का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपने युद्धपोतों को भेजकर सैन्यवाद को हवा दे रहा है। अमेरिका अवसर का लाभ उठाकर चीन के साथ अपने मतभेदों को हवा दे रहा है ताकि दक्षिण एशिया के क्षेत्र में अपनी सैनिक उपस्थिति को मज़बूत कर सके।
जी-7 के सदस्य देश यद्यपि सीधे रूप से पूर्वी एशिया के सुरक्षा मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं परंतु अमेरिका चाहता है कि जी-7 चीन के मुकाबले में वाशिंग्टन के दृष्टिकोण का समर्थन करे ताकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को अलग- थलग कर सके।
इसका अर्थ यह है कि अमेरिका अपने आर्थिक घटकों को चीन के दक्षिणी व पूर्वी सागर से संबंधित मामलों में भिड़ाकर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय समस्या का रूप देना चाहता है परंतु जी-7 के दूसरे सदस्य देश दक्षिणी व पूर्वी चीन सागर के संबंध में बीजींग की संवेदनशीलता से अवगत हैं इसलिए प्रतीत नहीं हो रहा है कि वे अमेरिका के कारण चीन के साथ अपने व्यापारिक हितों को खतरे में डालेंगे। MM