सीरिया के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों में वृद्धि
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यूरोपीय संघ ने सीरिया की क़ानूनी सरकार के विरुद्ध अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी रखते हुए इस देश के ख़िलाफ़ अपने प्रतिबंधों की समय सीमा में वृद्धि कर दी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ३०, २०१७ १०:१४ Asia/Kolkata

यूरोपीय संघ ने सीरिया की क़ानूनी सरकार के विरुद्ध अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी रखते हुए इस देश के ख़िलाफ़ अपने प्रतिबंधों की समय सीमा में वृद्धि कर दी है।

यूरोपीय संघ ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान जारी करके घोषणा की है कि सीरिया के ख़िलाफ़ इस संघ के प्रतिबंध अन्य एक साल अर्थात जून 2018 तक के लिए बढ़ाए जा रहे हैं। इस बयान में कहा गया है कि सीरिया की सरकार के अलावा इस देश का समर्थन करने वाली सरकारें भी इन प्रतिबंधों का पात्र बनेंगी। इन प्रतिबंधों के अनुसार सीरिया के 240 लोगों और 67 संस्थाओं पर यात्रा और संपत्ति ज़ब्त करने जैसी पाबंदियां लगाई गई हैं। सीरिया संकट के बारे में यूरोपीय संघ की नीति में परिवर्तन संबंधी कुछ लोगों की आशाओं के विपरीत इन प्रतिबंधों ने दर्शा दिया है कि यूरोपीय संघ अब भी सीरिया की क़ानूनी सरकार पर दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। एक अहम बिंदु यह है कि सीरिया पर प्रतिबंधों में वृद्धि ठीक उस समय हुई है जब रूस के राष्ट्रपति विलादिमीर पुतीन फ़्रान्स पहुंचे हैं और उन्होंने इस देश के नए राष्ट्रपति एमानोइल मैक्रोन से सीरिया संकट के बारे में बात की है। इस प्रकार प्रतिबंधों की समय सीमा में वृद्धि को सीरिया संकट के बारे में यूरोपीय संघ के वास्तविक रुख़ की निशानी समझा जा सकता है।

 

फ़्रान्स के राष्ट्रपति मैक्रोन ने पुतीन से मुलाक़ात के बाद कहा कि सीरिया में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल रेड लाइन है और इन हथियारों का किसी भी प्रकार का इस्तेमाल हमें प्रतिक्रिया पर बाध्य करेगा। निश्चित रूप से मैक्रोन का इशारा सीरिया में आतंकी गुटों की ओर से रासायनिक हथियारों के प्रयोग की ओर नहीं था बल्कि वे एक प्रकार से सीरिया की सरकार को इसके लिए कटघरे में खड़ा कर के उसे धमका रहे थे। उन्होंने इस प्रकार का रुख़ अपना कर सीरिया की सरकार के बारे में फ़्रान्स समेत यूरोपीय संघ के नकारात्मक रवैये पर ही बल दिया है। दूसरी ओर अमरीका के साथ यूरोप भी सीरिया में अपने लक्ष्यों की पूर्ति के मार्ग में प्रभावी बाधा के रूप में रूस की भूमिका से पूरी तरह अवगत है और उसके ख़िलाफ़ मानसिक व प्रचारिक युद्ध फैला कर और राजनैतिक व कूटनैतिक दबाव बढ़ा कर, सीरिया संकट में रूस की नीति को बदलवाने, उसके द्वारा दमिश्क़ सरकार के समर्थन को बंद कराने और सीरिया में रूस की सैन्य उपस्थिति को कम करवाने की कोशिश कर रहा है। (HN)