अमरीका, सऊदी संकट पर सेंक रहा है रोटी
सऊदी अरब और उसके घटकों के क़तर के साथ तनाव के बीच अमरीकी सरकार ने दोहा को 12 अरब डाॅलर के 36 एफ़-15 युद्धक विमान बेचने के पर सहमति व्यक्त कर दी है।
यह समाचार एेसी स्थिति में सामने आया है कि इससे पहले अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कुछ बयानों और ट्वीट के माध्यम से रियाज़ और दोहा के बीच तनाव में सऊदी अरब का पक्ष लिया और क़तर पर आतंकवादियों के वित्तीय समर्थन का आरोप लगाया था । यद्यपि अमरीका के विदेशमंत्री रक्स टेलरसन और रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ट्रम्प के इस दृष्टिकोण के विरोधी रहे हैं। अमरीका के इन दोनों मंत्रालयों ने बल दिया है कि फ़ार्स की खाड़ी के दक्षिणी तटवर्ती देशों में उत्पन्न होने वाले राजनैतिक संकट को शांतिपूर्ण तरीक़े से हल किया जाए और कूटनयिक सबंधों को तोड़ने, आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री परिवेष्टन से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
अब एेसा प्रतीत होता है कि क़तर और सऊदी अरब के बीच राजनैतिक संकट पर अमरीका के भीतर कुछ दिनों की चर्चा के बाद वाशिंग्टन ने एक प्रकार से इस बारे में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। दूसरे शब्दों में ट्रम्प के हालिया सऊदी अरब के दौरे के दौरान 110 अरब डाॅलर के हथियारों के समझौते के बाद दोहा भी 36 एफ़-15 युद्धक विमानों की ख़रीदारी के लिए 12 अरब डाॅलर देगा। फ़ार्स की खाड़ी के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्र में पैदा होने वाले तनाव से सबसे अधिक अमरीकी हथियारों की कंपनियां चमक रही हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से पिछले कुछ महीनों के दौरान, वाशिंग्टन ने हर समय से अधिक आर्थिक व व्यापारिक लाभ के लिए क़दम बढ़ाया है। अमरीका, प्राचीन संकट को हवा देकर सुरक्षा संकट पैदा करने के बाद अपनी दुकान चमकाने में लगा हुआ है। उदाहरण स्वरूप कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु संकट बढ़ने के समय ट्रम्प ने आरंभ में तो उत्तरी कोरिया को युद्ध की धमकी दी और फिर अप्रत्याशित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया को थाड मीज़ाइल सिस्टम लगाने के लिए अमरीका को एक अरब डाॅलर देना होगा। (AK)