यमन का ख़ून और ट्रम्प की राल
युनिसेफ़ की रिपोर्ट है कि हर 35 सेकेंड में एक यमनी बच्चा कालरा की चपेट में आ रहा है।
एक हज़ार से अधिक मौतें हो चुकी हैं और आशंका है कि कालरा की चपेट में आने वाले यमनी नागरिकों की संख्या इस साल के अंत तक ढाई लाख से अधिक हो जाएगी।
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सऊदी अरब के हालिया दौरे में रक्षा सौदों के बदले जो उपहार दिया है वह यमन में विध्वंस के रूप में साफ़ दिखाई दे रहा है। यमन विडंबना में अमरीका भी पूरी तरह लिप्त है।
यह बात सही है कि यमन संकट में वाशिंग्टन का हस्तक्षेप नया नहीं है लेकिन बाराक ओबामा की सरकार ने गत वर्ष नवंबर महीने में सनआ में शोक सभा पर सऊदी अरब की बमबारी में डेढ़ सौ लोगों के जनसंहार के बाद सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियारों की सप्लाई रोक दी थी लेकिन ट्रम्प सरकार ने अमरीकी युद्ध मंत्री जेम्स मैटिस के अनुसार व्यापार सामान्य रूप से बहाल कर दिया है।
हथियारों की ख़रीदारी के सौदे का सीधा विनाशकारी प्रभाव यमन संकट और राजनैतिक प्रक्रिया पर पड़ेगा। क्योंकि यह सौदे जलती पर तेल का काम करेंगे।
डेमोक्रेट सेनेटर क्रिस मार्फ़ी ने सऊदी अरब के साथ होने वाले हथियारों के सौदे पर सेनेट में बहस के दौरान कहा था कि अमरीका का एसे युद्ध का समर्थन करने में कोई हित नहीं हो सकता जो हमारे शत्रु आतंकियों की मज़बूत बना रहा है और मानवीय त्रासदी उत्पन्न कर रहा है। इस युद्ध के बुरा परिणाम निश्चित रूप से हमें भी झेलने पड़ेंगे। लेकिन बात यह है कि अधिकाशं सेनेटरों को पहले ही हथियार कंपनियों की ओर से मोटी मोटी रक़में मिल चुकी हैं। इसी लिए रक्षा सौदों को सेनेट में भरपूर समर्थन मिल गया।
यह तो तय है कि ट्रम्प ने अपने चुनावी कैंपेन के दौरान सऊदी अरब से पैसा वसूलने की जो बात कही थी उस पर भरपूर अमल हो रहा है और ट्रम्प की टपकती राल इसका सबसे बड़ा सुबूत है जिन्हें कई सौ अरब डालर कर हथियार डील मिल चुकी है।
साभार अलक़ुद्स अल अरबी