अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना का इच्छुक नहीं
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करज़ई ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी क्रियाकलापों की कड़ी निंदा की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २८, २०१७ ११:५७ Asia/Kolkata
  • अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना का इच्छुक नहीं

करज़ई ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी क्रियाकलापों की कड़ी निंदा की है।

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अमरीकी कार्यसूचि में यह शामिल नहीं है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित की जाए।

करज़ई ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की वर्तमान स्थिति का मुख्य कारण आतंकवाद के बारे में अमरीका का दोहरा रवैया है।  उन्होंने कहा कि अमरीकी एजेन्डे में यदि यह बात शामिल होती कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित की जाए तो आज इस देश में दाइश का उदय न होता।  हामिद करज़ई ने कहा कि हालांकि अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना और आतंकवाद से संघर्ष के नारे के साथ प्रविष्ट हुआ था कि इसके बदले में उसने पूरे अफ़ग़ानिस्तान को युद्ध की आग में झोंक दिया और इस देश के नगरों और गावों पर भीषण बमबारी की।  एेसा पहली बार नहीं है कि जब अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति करज़ई अमरीकी नीतियों की आलोचना कर रहे हैं।  जिस काल में वे इस देश के राष्ट्रपति थे उस काल में भी वे अमरीकी नीतियों की आलोचना किया करते थे और हामिद करज़ई ने अपने राष्ट्रपति काल के अंत तक काबुल-वाशिंगटन सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये।

सन 2001 में आतंकवाद का मुक़ाबला करने तथा अलक़ाएदा और तालेबान की समाप्ति के उद्देश्य से अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान में प्रविष्ट हुआ था।  हालांकि 16 साल गुज़रने के बाद अबतक अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित होना तो दूर वहां पर अशांति और अराजकता पाई जाती है।  राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि इसका मुख्य कारण अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की उपस्थिति और आतंकवाद से संघर्ष के बहाने उसे अपनी छावनी में परिवर्तित करना है।  जानकारों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान का केन्द्रीय एशिया और रूस से निकट होने के साथ ही इस देश से चीन तक पहुंच ने इस देश को अमरीका तथा पश्चिमी शक्तियों की उपस्थिति का केन्द्र बना दिया है।

हामिद करज़ई की ओर से अफ़ग़ानिस्तान के बारे में अमरीकी क्रियाकलापों की आलोचना इस वास्तविकता की ओर संकेत है कि इस देश में अमरीका की उपस्थिति के कारण न केवल अफ़ग़ानिस्तान की बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति एवं सुरक्षा, गंभीर ख़तरे में पड़ गई है।