श्रीलंका ने अपनी एक बंदरगाह पट्टे पर चीन को दे दी
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हम्बनटोटा बंदरगाह एशिया और यूरोप के बीच जहाज़रानी के मार्ग में काफ़ी महत्व रखती है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ३०, २०१७ १४:४१ Asia/Kolkata

हम्बनटोटा बंदरगाह एशिया और यूरोप के बीच जहाज़रानी के मार्ग में काफ़ी महत्व रखती है।

श्रीलंका ने चीन के साथ एक समझौता करके देश के दक्षिण में स्थित हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल के पट्टे पर बीजींग को दे दिया है। हम्बनटोटा बंदरगाह एशिया और यूरोप के बीच जहाज़रानी के मार्ग में काफ़ी महत्व रखती है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति इस समझौते को व्यवहारिक बनाने में कोई विशेष रुचि नहीं रखते थे क्योंकि सत्ता में पहुंचने हेतु उनकी सफलता को एक प्रकार से भारत की सफलता के रूप में देखा जा रहा था।

श्रीलंका ने चीन के साथ जो समझौता किया है और देश के दक्षिण में स्थित हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल के पट्टे पर दे दिया है उसके इस कार्य को भारत बिल्कुल पसंद नहीं करता और वह इसका मुखर विरोधी है परंतु चीन ने तमिल छापामारों से मुकाबला करने में श्रीलंका की बहुत अधिक सैनिक सहायता की है और उसने श्रीलंका में बहुत अधिक पूंजी निवेश किया है इन सब बातों के दृष्टिगत श्रीलंका ने हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल के पट्टे पर उसे दे दिया है।

साथ ही हम्बनटोटा बंदरगाह को चीन को इस शर्त के साथ दिया गया है कि इस बंदरगाह की सुरक्षा का मामला श्रीलंका के हाथ में रहेगा और चीन सैनिक लक्ष्यों के लिए इस बंदरगाह का प्रयोग नहीं करेगा।

हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 वर्षों के लिए चीन के हवाले करने के संबंध में जो समझौता हुआ है उसे बीजींग क्षेत्र विशेषकर भारत के मुकाबले में बहुत बड़ी सफलता के रूप में देख रहा है क्योंकि इस बंदरगाह का चीन के अधिकार में होना आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है जबकि श्रीलंका के लोग विशेषकर वहां के किसान इस बंदरगाह को पट्टे पर चीन के हवाले किये जाने के विरोधी हैं और उनका मानना है कि कोलंबो सरकार खेती की ज़मीनों को औद्योगिक इकाईयों के निर्माण के लिए चीन को देने के प्रयास में है।

इसी कारण अभी हाल ही में कोलंबो सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन भी हुए थे। श्रीलंका के एक विरोधी सांसद इस बारे में कहते हैं कि विरोधियों को इस बात का भय है कि हम्बनटोटा बंदरगाह और उसके आस- पास का इलाक़ा चीनी उपनिवेश में बदल जायेगा। MM