रूस और अमरीका के बीच नया शीत युद्ध,
अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रम्प की जीत के बाद से यह देश आंतरिक स्तर पर भी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनैतिक शीतयुद्ध से जूझ रहा है। ट्रम्प के अक्खड़पन और विभिन्न आंतरिक व अंतर्राष्ट्रीय मामलों में उनके अड़ियल रवैये की वजह से अमरीका के भीतर दो मोर्चे बन गए हैं और इसका बड़ा कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शीत युद्ध की शुरूआत है।
ट्रम्प की प्राथमिकताओं में वाशिंग्टन मास्को संबंधों को मज़बूत बनाना था, लेकिन अमरीकी कांग्रेस ने रूस पर जो नए प्रतिबंध लगाए उससे न केवल यह कि ट्रम्प की यह योजना विफल हो गई बल्कि रूस और अमरीका के बीच तनाव पहले से ज़्यादा हो गया। रूस ने ओबामा के शासन काल में अमरीकी कूटनयिकों को बाहर निकालने का इरादा बदल दिया था लेकिन इस बार अमरीका ने रूस के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाया उसके जवाब में पुतीन सरकार ने रूस से 755 अमरीकी कूटनयिकों को बाहर कर दिया। पुतीन ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि रूस संभव है कि अमरीका के ख़िलाफ़ अभी और भी कार्यवाहियां करे।
अमरीका और रूस के बीच युक्रेन संकट और सीरिया संकट सहित अनेक मुद्दों पर गहरा मतभेद है और इन परिस्थितियों में यदि रूप के ख़िलाफ़ अमरीका का उत्तेजक रवैया जारी रहा तो हालात और भी ख़राब हो सकते हैं। शीत युद्ध के नतीजे में कमज़ोर पड़ जाने वाला रूस अब एक बार फिर अमरीका के सामने मज़बूत प्रतिस्पर्धी के रूप में मौजूद है। ट्रम्प के काल में रूस और अमरीका के बीच जो शीत युद्ध है वह दूसरे शीत युद्धों से बिल्कुल अलग है। ट्रम्प यह चाहते हैं कि रूस और पुतीन से सीधा टकराव न हो। ट्रम्प सरकार चाहती है कि क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के मामले में रूस से सहयोग किया जाए और साथ ही उसे कंट्रोल करने की भी कोशिश की जाए। ट्रम्प को एसा लगता है कि अगर अमरीका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई भूमिका निभाना चाहता है तो रूस के सहयोग के बग़ैर यह संभव नहीं है लेकिन यह बात भी है कि ईरान, चीन, यूक्रेन और नैटो जैसे मामलों में दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं।
दूसरी ओर ट्रम्प प्रशासन पर रूस के मामले में भीतर से भारी दबाव है। रूस के संबंध में अमरीका के भीतर संस्थाएं और राजनेता पूरी तरह से विभाजित हो गए हैं।
इस बिंदु पर ध्यान देना ज़रूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों में अमरीका के प्रवेश के बाद वाशिंग्टन को हमेशा एक दुशमन की ज़रूरत रही है। शीत युद्ध का ज़माना गुजर जाने के बाद भी अमरीका ने रूस को हमेशा अपने शत्रु के रूप में पेश किया। वर्तमान समय में ट्रम्प ने जो रवैया अपनाया है उससे अमरीका के भीतर भी और अमरीका के बाहर भी ट्रम्प शासन एक चुनौती बन गई है।
यह बात भी याद रखना चाहिए कि अमरीका के पुराने घटक इस समय अतीत की तरह अमरीका का साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं। नैटो के महासचिव येन्स स्टोलटेनबर्ग ने भी कहा है कि नैटो का रूस से टकराव का कोई इरादा नहीं है। इसके अलावा ट्रम्प प्रशासन के बारे में कहा जाता है कि उसने अंतर्राष्ट्रीय मामलों से निपटने के लिए कोई ठोस और समग्र रणनीति नहीं बनाई है। जबकि आंतरिक टकराव से निपटने में भी यह सरकार अक्षम दिखाई देती है। अतः एसा लगता है कि अमरीका आंतरिक मामलों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों में अधिक जटिलताओं में उलझता जाएगा।