अब महिला तालेबान
आतंकवाद के बाज़ार में आजकल भीड़भाड़ ज़्यादा है। यदि एक आतंकी संगठन के विरोध में कोई दूसरी स्थानीय आतंकी संगठन नहीं खड़ा हो जाता तो खुद उस आतंकी संगठन के भीतर ही सरग़नाओं की लड़ाई शुरू हो जाती है।
इसी बीच दाइश एक नए अंदाज़ का आतंकी संगठन उभरा जिसे देखने के बाद ताहरीके तालेबान पाकिस्तान जैसे आतंकियों को यह ख़याल आया कि उन्होंने तो बहुत से आयामों पर काम ही नहीं किया।
महिलाओं को तालेबान ने हमेशा नज़रअंदाज़ किया। उन्हें पत्थर मार मार कर ख़त्म कर देना, स्कूलों और बाज़ारों से खदेड़ कर घर की चारदीवारी में बंद कर देना यह तालेबान का अब तक रवैया था लेकिन अब तालेबान ने पाकिस्तान में महिलाओं की भर्ती पर काम शुरू कर दिया है। तालेबान ने अपने मैगज़ीन में इसका प्रचार शुरू कर दिया है और इसी संदर्भ में संगठन के सरग़ना फ़ज़्लुल्लाह की बीवी का इंटरव्यू भी छापा है। तालेबान के मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि मैगज़ीन इस बात का सुबूत है कि अब यह आतंकी संगठन विदेशी महिला लड़ाकों की भर्ती की योजना भी बना रहा है। आतंकी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य वर्ग के परिवारों की लड़कियों के लिए तालेबान के प्रोपैगंडे से प्रभावित होने का ख़तरा ज़्यादा है।
इसमें कोई शक नहीं है कि तालेबान अपना नया मैगज़ीन शुरू करके हक़ीक़त में दाइश की राह पर चलने की कोशिश में है। तालेबान उस वर्ग की लड़कियों को अपने प्रोपैगंडे का शिकार बनाना चाहता है जो पारम्परिक परिवारों में महिला की भूमिका से अलग हटकर जीवन बिताने के लिए लालायित हों।
यह बड़ी चालाकी भरी योजना है। दाइश के केस में तो यह योजना बहुत सफल रही थी। वर्ष 2014 में पूरी तरह प्रकाश में आ जाने के बाद भी दाइश महिलाओं की भर्ती जारी रखने में सफल रहा। दाइश का अलज़ौरा स्कूल जो महिलाओं की भर्ती के लिए स्थापित किया गया यह ज़ाहिर करता है कि यह योजना किस तरह काम करती है। दाइश का एक प्रमुख वाक्य था वह महलाएं जो सफ़ेद ड्रेस और हवेली के बजाए विस्फोटक बेल्ट और आत्मघाती बम धमाके में अधिक रूचि रखती हैं।
महिलाओं की भर्ती के बारे में तालेबान की योजना का पाकिस्तान की इंटेलीजेन्स एजेंसियों को तत्काल नोटिस लेना चाहिए। महिलाओं को शक्तिशाली बनाने के नाम पर आतंकी उनका शोषण करते हैं यह सच्चाई सब के सामने आ चुकी है। तालेबान पाकिस्तान में लड़कों की भर्ती में जिस तरह सफल होते रहे हैं उसका कारण बेरोज़गारी और सोशल मीडिया के कारण आसान संपर्क है। और अब लगता है कि पाकिस्तान की महिलाओं की बारी आ गई है और वह आतंकी प्रोपैगंडे का आसान शिकार साबित हो सकती हैं।
साभार डान अख़बार