अमरीका, आतंकवाद और पाकिस्तान – 1
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हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने दक्षिणी एशिया और विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से संबंधित और क्षेत्र में आतंकवाद की परिधि में अपनी नई रणनीति की घोषणा की।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug ३०, २०१७ २१:०० Asia/Kolkata
  • अमरीका, आतंकवाद और पाकिस्तान – 1

हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने दक्षिणी एशिया और विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से संबंधित और क्षेत्र में आतंकवाद की परिधि में अपनी नई रणनीति की घोषणा की।

21 अगस्त सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति ने वर्जिनिया में स्थित आर लिंग्टन नेश्नल सिमिट्री के निकट आयोजित एक समारोह में जहां एक ओर अफ़ग़ानिस्तान के लिए नई रणनीति की घोषणा की, वहीं साथ ही साथ पाकिस्तान और भारत से संबंधित भी अपनी रणनीति को बयान किया।

अमरीकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद के विरुद्ध की जाने वाली अथक मेहनत और संघर्ष को अपने एक वाक्य से टुकड़े टुकड़े कर दिया और कह दिया कि पाकिस्तान आतंकवादियों को सुरक्षित शरणस्थलियां दे रहा है। राजनैतिक विशेषज्ञों ने अमरीका की नई रणनीति के बारे में अपना दृष्टिकोण पेश करते हुए कहा कि वास्तव में यह अमरीका की पुरानी नीति है, जिसे नए रूप में पेश किया जा रहा है। यहां यह बात भी ध्यान योग्य है कि ट्रम्प ने इसी वर्ष में एक बार फिर पाकिस्तान के विरुद्ध भारत के समर्थन में बयान दिया है और अफ़ग़ानिस्तान में भारत की भूमिका के कारण आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने उलटा यह कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे को हल करने के इच्छुक हैं, हांलाकि किसी भी रूप में देखा जाए तो अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे के समाधान में पाकिस्तान की भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती क्योंकि पाकिस्तान पड़ोसी देश है जबकि भारत की कोई भी सीमा अफ़ग़ानिस्तान से नहीं मिलती।

 

 

अलबत्ता यहां पर एक बात और ध्यान योग्य यह भी है कि अतीत में इसी अमरीका ने ही अफ़ग़ानिस्तान में समस्याएं पैदा की थीं, रूस के विरुद्ध सशस्त्र गुटों की सहायता करने वाला अमरीका ही था और दुर्भाग्य यह है कि पाकिस्तान के कुछ राजनेताओं ने अमरीका के हाथों प्रयोग होकर रूस को पराजित करने की ठान ली और इसे पवित्र जेहाद का नाम देकर उठ खड़े हुए। बहरहाल यदि देखा जाए तो अफ़ग़ानिस्तान के इस अमरीकी नेतृत्व में आरंभ होने वाले जेहाद से पाकिस्तान की गलि कूचों में बहने वाला मासूम इंसानों का ख़ून और आतंकवाद का मुद्दा वास्तव में अमरीका के हाथों ही तैयार किया गया है। ट्रम्प ने अपने भाषण में पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी गुटों के गठन के बारे में कहा है कि दुनिया के किसी भी क्षेत्र से तुलना करें तो यह संख्या पाकिस्तान में बहुत अधिक है। उसके बाद ट्रम्प ने एक बार फिर पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि आराजकता, हिंसा और आतंकवाद फैलाने वालों को पाकिस्तान अकसर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करता है, यह बहुत ख़तरनाक है क्योंकि पाकिस्तान और भारत परमाणु हथियारों से लैस दो देश हैं और उनके तनावग्रस्त संबंध किसी भी समय और अधिक तनावग्रस्त होकर लड़ाई का रूप धारण कर सकते हैं, यह ख़तरा रहता है।

 

 

उन्होंने बार्सिलोना में आतंकवाद की नई घटना का उदाहरण पेश किया और याद दिलाया कि सऊदी अरब में तीन महीना पहले भी वह भाषण में कह चुके हैं कि आतंकवाद को उनके क्षेत्रों और वित्तीय स्रोतों से वंचित कर देंगे और उनके झूठे दृष्टिकोणों को बेनक़ाब करेंगे। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तानम  अमरीकी हित स्पष्ट हैं कि वह यहां आतंकवादी गुटों के सुरक्षित ठिकानों के दोबारा गठन को हर क़ीमत पर रोकेंगे, क्यों यह अमरीका के लिए ख़तरा हैं और इसको भी रोकेंगे कि परमाणु हथियार या पदार्थ आतंकवादियों के हाथ लग जाएं, जो वह अमरीका के विरुद्ध भी प्रयोग कर सकते हैं।

 

 

वास्तव में अमरीकी राष्ट्रपति यहां अपने भाषण में यह बात बताना भूल गये हैं कि इन आतंकवादियों को हमेशा वित्तीय और सामरिक सहायता उपलब्ध करने वाला अमरीका ही था और है और उसने न केवल इन आतंकवादी गुटों को पैदा करने में भूमिका अदा की बल्कि दुनिया भर में आतंकवादियों के पालन पोषण में भी अमरीका की अद्वितीय भूमिका रही है।

 

 

अमरीकी राष्ट्रपति ने यह भी नीं बताया कि सीरिया, इराक़ और लेबनान सहित लीबिया और अन्य अरब देशों में दाइश और नुस्रा फ़्रंट नामक आतंकवादी गुटों को अमरीका, इस्राईल के साथ मिलकर किसी सीमा तक सहायता कर रहा है? इसके अलावा अमरीकी राष्ट्रपति को शायद यह जानकर बहुत दुख होगा कि एक दिन पहले ही पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग ने प्रेस कांफ़्रेंस में दाइश और अन्य दूसरे आतंकवादी गुटों के नेटवर्क को ख़ैबर-4 आप्रेशन में तोड़ने और समाप्त करने की घोषणा की थी। वास्तव में अमरीकी राष्ट्रपति को इस बात पर बहुत दुख हुआ होगाकि उनके पालतू आतंकवादियों के विरुद्ध पाकिस्तानी सेना का मज़बूत संघर्ष अनुदाहरणीय है।

 

 

ट्रम्प ने अपनी नई नीति में पाकिस्तान के बारे में कहा कि पाकिस्तान में तालेबान और अन्य आतंकवादी गुटों को सुरक्षित ठिकानों पर कि जो क्षेत्र और क्षेत्र से बाहर के देशों के लिए ख़तरा हैं, अमरीकी सरकार चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी प्रयासों में शामिल होकर पाकिस्तान बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है जबकि अपराधियों और आतंकवादियों को शरण देकर और उनकी रक्षा करके बहुत कुछ गंवा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अतीत में पाकिस्तान एक विश्वसनीय भागीदार था और संयुक्त दुश्मनों के विरुद्ध अमरीकी और पाकिस्तानी सेना ने मिलकर युद्ध भी किए हैं। पाकिस्तानी जनता आतंकवाद और चरमपंथ का शिकार है, अमरीका उनके सहयोग और बलिदान को स्वीकार करता है किन्तु पाकिस्तान इन संगठनों को शरण भी देता है जो हर रोज़ हमारे लोगों को मारने का प्रयास करती हैं। ट्रम्प के अनुसार पाकिस्तान ऐसे समय में इन आतंकवादियों को शरण दे रहा है कि जब अमरीका, पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए जा रहा है किन्तु अब इसे परिवर्तित होना चाहिए और यह त्वरित रूप से बदले। ट्रम्प ने कहा कि कोई भागीदारी इस प्रकार नहीं चल सकती कि वह हमारे सैनिकों या अन्य सरकारी अधिकारियों को मारने वाले आतंकवादियों को शरण दें। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान सभ्य, व्यवस्थित और शांति का प्रदर्शन करे।

 

 

जहां तक आतंकवादी गुटों के ठिकानों का मामला है तो पाकिस्तानी सेना ने निरंतर “ज़रबे अज़्ब” और “रद्दुल फ़साद” सहित ख़ैबर-4 आप्रेशन अंजाम दिए हैं जिसके कारण आतंकवादियों की बड़ी संख्या का सफ़ाया किया गया। वास्तव में ट्रम्प की मुख्य समस्या यह है कि सीरिया और इराक़ सहित दूसरे अरब देशों से दाइश की पराजय के बाद दाइश को अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में पहुंचाना है जिसको पाकिस्तानी सेना ने पहले ही भांपकर इन आतंकवादी गुटों के विरुद्ध चाहे उनका संबंध दाइश से हो या तालेबान से, सबके विरुद्ध बिना किसी अंतर के सफल अभियान अंजाम दिए हैं जिसके कारण इन आतंकवादियों का सफ़ाया हो रहा है। इसी प्रकार अमरीकी राष्ट्रपति ने अरबों डॉलर की सहायता की बात की है तो अमरीकी राष्ट्रपति को यह पता होना चाहिए कि उनकी इस मामूली सहायता के बदले पाकिस्तान को खरबों डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ा है जबकि एक लाख से अधिक पाकिस्तानी मारे गये हैं जो अमरीका समर्थित आतंकवादियों की भेंट चढ़े हैं।

 

 

यदि डोनल्ड ट्रम्प यह कहते हैं कि अमरीका ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए तो दूसरी ओर पाकिस्तान को इस युद्ध में खरबों डॉलर का वार्षिक नुक़सान हुआ है क्योंकि एक ओर आतंकवाद के कारण देश का आधारभूत ढांचा तबाह हुआ है, जानी नुक़सान हुआ है और इसके साथ आतंकवाद के कारण पाकिस्तान से बड़े कारोबार दूसरे देशों में शिफ़्ट हो गये। यदि देखा जाए तो अमरीका की ओर से पाकिस्तान को आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के नाम पर कुछ अरब डॉलर दिए गये जबकि पाकिस्तान को कई खरब डॉलर का नुक़सान हुआ है।

 

 

यहां पर एक बिन्दु ध्यान योग्य है कि पाकिस्तान को अपनी नीति में अमरीका की ग़ुलामी छोड़नी होगी क्योंकि यह ग़लत नीति लियाक़त अली ख़ान के काल में आरंभ हुई थी जिसके कारण पाकिस्तान को हमेशा नुक़सान ही उठाना पड़ा है। पाकिस्तान को आज नहीं तो कल अपनी नीतियां बदलनी ही पड़ेंगी नहीं तो अमरीका से जिस जिस ने भी दोस्ती की है उसे तबाही और बर्बादी के अलावा कुछ नहीं मिला है। (AK)

 

* पार्स टूडे का लेखक के विचारों से सहमत होना आवश्यक नहीं है *

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