विश्व शांति में ब्रिक्स के रोल निभाने पर चीन की ताकीद
चीन में ब्रिक्स गुट के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के अवसर पर चीनी राष्ट्रपति ने विश्व शांति व स्थिरता को मज़बूत करने में ब्रिक्स के योगदान देने पर बल दिया।
शी जीन पिंग ने फ़ूजिया राज्य के शियामन शहर में ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों को दूर करने में सार्थक योगदान देने पर बल दिया। चीनी राष्ट्रपति का मानना है कि सीरिया, लेबनान और फ़िलिस्तीन के संकट को सैन्य विकल्प के बजाए राजनैतिक मार्ग से हल करना चाहिए।
ऐसा लगता है कि चीन अमरीका की आक्रमक नीति को क़ाबू में करने के लिए शंघाई सहयोग संगठन के बाद, ज़रूरी उपाय के तहत ब्रिक्स जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन की राजनैतिक स्थिति को मज़बूत बनाकर अपनी नीतियों व कार्यक्रमों के लिए एक आधार चाहता है। क्योंकि चीन अपनी आर्थिक प्रगति के मद्देनज़र किसी भी स्थिति में अमरीका से टकराव नहीं चाहता।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ केनेथ शॉर्टगन ब्रिक्स के बारे में कहते हैं कि ब्रिक्स अपनी शक्ति का अधिक प्रदर्शन कर 400 साल से दुनिया के भविष्य के निर्धारण में पश्चिम के वर्चस्व को ख़त्म करना चाहता है और भविष्य में विकासशील देशों का इस गुट से जुड़ना बहुत अहम साबित होगा। भविष्य में मुमकिन है कि ब्रिक्स पश्चिम के ख़िलाफ़ एक बहुत बड़े राजनैतिक गठजोड़ के वजूद में आने का कारण बने।
इसके बावजूद ब्रिक्स उस समय विश्व अर्थव्यवस्था व राजनीति में एक प्रभावी शक्ति बन सकता है जब सदस्य देश अपने भीतर के मतभेद को दूर कर लें। जैसा कि चीन का भारत के साथ सीमा विवाद है।
सीमावर्ती मतभेद के अलावा भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्र में ब्रिक्स के सदस्य देश चीन, भारत, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीक़ा के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा भी है। चीन के क्षेत्रीय वर्चस्व के मार्ग में भारत और रूस बहुत बड़ी रुकावट समझे जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रूस, भारत और ब्राज़ील कई ध्रुवीय व्यवस्था का गठन चाहते हैं जबकि चीन ऐसी दो ध्रुवीय व्यवस्था चाहता है जिसके दूसरे सिरे पर वह ख़ुद अमरीका के मुक़ाबले में हो।
बहरहाल ब्रिक्स अगर सदस्य देशों के राजनैतिक आधार के लिए एक हथकंडा न बने तो भविष्य में अपने आर्थिक विकास के ज़रिए जैसा कि अनुमान है, 2035 तक दुनिया के सात बड़े औद्योगिक देशों को पीछे छोड़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी गुट बन कर उभरेगा। (MAQ/T)