अमरीका, उत्तर कोरिया और कोरिया प्रायद्वीप में संकट का जारी क्रम
उत्तर कोरिया की ओर से पहले हाइड्रोजन बम के टेस्ट के एलान के बाद अमरीकी अधिकारी साफ़ तौर पर प्यूंग यांग के ख़िलाफ़ सैन्य हमले की प्रबल संभावना जता रहे हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने एक पत्रकार के इस सवाल पर कि क्या वह उत्तर कोरिया पर सैन्य हमले का आदेश जारी करेंगे, कहा कि देखते हैं क्या होता है।
इसके साथ ही अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्ज़ मैटिस ने भी दावा किया कि वॉशिंग्टन के पास उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य विकल्प ज़्यादा हैं। अलबत्ता 7 महीना पहले अमरीकी सत्ता पर ट्रम्प के पहुंचने और उनके पहले की सरकारों ने भी इस तरह के बयान दिए थे। अमरीका ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और प्रचार के क्षेत्र में बहुत सी कार्यवाहियां कीं लेकिन ये कोशिशें उत्तर कोरिया को परमाणु व मीज़ाईल क्षमता को बढ़ाने से नहीं रोक सकीं।
हालांकि अमरीकी अधिकारी विगत की तुलना में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य हमले की धमकी और खुल कर दे रहे हैं, लेकिन अगर अमरीका के पास उत्तर कोरिया पर सैन्य हमले या उसके परमाणु व मीज़ाईल कार्यक्रम को रुकवाने की ताक़त होती तो बहुत पहले वह ऐसा कर चुका होता।
वॉशिंग्टन पोस्ट ने एक लेख में लिखा, “राजनैतिक टीकाकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया पर अमरीका के हमले से न सिर्फ़ यह कि मुश्किल हल नहीं होगी बल्कि बहुत सी मुसीबतें जन्म लेंगीं। इसलिए कोरिया प्रायद्वीप में मौजूदा संकट को कल करने का बेहतरीन उपाय द्विपक्षीय बातचीत है।”
जिस तरह प्यूंग यांग के ख़िलाफ़ ट्रम्प की पहली वाली धमकी खोखली निकली उम्मीद की जाती है कि उनकी और मैटिस की ताज़ा धमकी भी ऐसी ही होगी सिर्फ़ इस फ़र्क़ के साथ कि अमरीकी अधिकारी जितने साफ़ अंदाज़ में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य हमले की बात करेंगे उतनी ही तेज़ी से प्यूंगयांग अपने परमाणु व मीज़ाईल कार्यक्रम को विकसित करने का दृढ़ संकल्प लेगा। (MAQ/T)