रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं जारी
इराक़ के प्रधानमंत्री और इराक़ी नेश्नल गठबंधन के प्रमुख ने दो अलग अलग बयान जारी करके म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार की निंदा की है।
इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने संयुक्त राष्ट्र संघ और इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी के नाम पत्र में लिखा कि म्यांमार में रोहिंग्या अल्पसंख्यक मुसलमानों के विरुद्ध जो हो रहा है वह जातीय सफ़ाया है और संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह इस जनसंहार पर कड़ा रुख़ अपनाए।
इराक़ी प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी को एक आपातकालीन बैठक बुलाने और रोहिंग्या मुसलमानों की मुक्ति के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के गठन की आवश्यकता पर बल दिया है।
दूसरी ओर इराक़ के नेश्नल गठबंधन के प्रमुख सैयद अम्मार हकीम ने एक बयान जारी करके अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मांग की है कि वह म्यांमार के मुसलमानों के संबंध में अपनी ज़िम्मेदारियों पर अमल करे क्योंकि म्यांमार के मुसलमान विध्वंसक हिंसा का शिकार हैं।
दूसरी ओर आज़रबाइजान गणराज्य के विदेशमंत्री ने कहा है कि विश्व समुदाय को चाहिए कि म्यांमार के मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी मार्ग तलाश करे।
आज़रबाइजान गणराज्य की सरकारी न्यूज़ एजेन्सी आपा की रिपोर्ट के अनुसार अलमार ममदयारोफ़ ने जार्जिया, तुर्की और आज़रबाइजान गणराज्य के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक की समाप्ति के बाद कहा कि कुछ वर्षों से म्यांमार के मुसलमानों को भीषण यातनाओं का सामना है और हम इस बात पर बल देते हैं कि इस मामले का समीक्षा की जानी चाहिए।
ज्ञात रहे कि हालिया दिनों में राखीन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार की सेना के ताज़ा हमलों में बच्चों और महिलाओं समेत 400 से भी अधिक लोग मारे जा चुके हैं और क़रीब 1 लाख 25 हज़ार लोगों ने अपना घरबार छोड़कर पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ली है। ग़ैर सरकारी सूत्रों का कहना है कि म्यांमार की सेना और बौद्ध चरमपंथियों के हमले में 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके है जबकि लाखों से अधिक लोग बेघर हुए हैं। (AK)