चीन और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
चीन देश के दक्षिणी भाग में आस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने जा रहा है। इससे पहले दोनों देशों ने 2015 और 2016 में ऑस्ट्रेलिया में संयुक्त युद्ध अभ्यास किया था। *
चीन और ऑस्ट्रेलिया ऐसी स्थिति में सैन्य सहयोग में विस्तार कर रहे हैं, कि दोनों देश दो विभिन्न सामरिक समूहों में गिने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया, अमरीका का घटक देश है और नाइन इलेवन की घटना के बाद, वाशिंग्टन के आतंवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के परिप्रेक्ष्य में उसने पूर्वी एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में थानेदार की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। लेकिन मलेशिया और इंडोनेशिया के विरोध ने उसकी इस भूमिका के विस्तार को रोक दिया। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया का प्रयास है कि अमरीका और जापान के सहयोग से क्षेत्र में एक शक्तिशाली त्रिकोण उत्पन्न करे।
चीन के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया का कड़ा रवैया औऱ उत्तर कोरिया को लेकर उसका अमरीकी नीतियों को समर्थन यह स्पष्ट करता है कि ऑस्ट्रेलिया किसी भी स्थिति में चीन की शक्ति को बढ़ते हुए नहीं देख सकता और क्षेत्र पर उसके वर्चस्व का विरोधी है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया चीन विरोधी हर संधि और युद्ध अभ्यास में भाग लेता है। चीन ने ऑस्ट्रेलिया की इस नीति की आलोचना भी की है।
इस संदर्भ में राजनीतिक मामलों के रूसी विशेषज्ञ केन्सतानतीन सीकोव का कहना हैः ऑस्ट्रेलिया वाशिंग्टन की नीतियों का पालन करता है और व्यवहारिक रूप से अमरीका के उपग्रह के तौर पर काम करता है। वह अमरीका के फ़ैसलों में शामिल रहता है। ऑस्ट्रेलिया ने कई बार साबित किया है कि वह अर्थव्यवस्था समेत कई क्षेत्र में चीन का विरोधी है।
ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास का आयोजन, बीजिंग की एक नपी तुली योजना मानी जा सकती है, ताकि अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के साथ सहोय करके जितना संभव हो सके अपने ख़िलाफ़ एक शक्तिशाली गठबंधन बनने से रोक सके।