रूस पर प्रतिबंधों के बारे में यूरोपीय संघ में मतभेद
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साइप्रस के विदेश मंत्रालय ने रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इसे लाभहीन बताया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep २१, २०१७ १४:५२ Asia/Kolkata
  • रूस पर प्रतिबंधों के बारे में यूरोपीय संघ में मतभेद

साइप्रस के विदेश मंत्रालय ने रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इसे लाभहीन बताया है।

रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंध, इस संघ के सदस्यों के बीच मतभेद गहराने का कारण बने हैं। यूरोपीय संघ ने 14 सितम्बर को अगले छः महीनों के रूस पर लगे प्रतिबंधों की समय सीमा बढ़ा दी है। यह क़दम माॅस्को की नज़र में ब्रसेल्ज़ की ओर से एक ग़ैर दोस्ताना और रुढ़िवादी कार्यवाही है। प्रतिबंधों की समय सीमा एेसी स्थिति में बढ़ाई गई है कि जब कई यूरोपीय देश बल देकर कह चुके हैं कि प्रतिबंधों से उन्हीं को नुक़सान हो रहा है। इस बात के दृष्टिगत की यूक्रेन के संकट से पहले तक यूरोपीय संघ, रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी था, स्वाभाविक रूप से माॅस्को की ओर से लगाए जाने वाले जवाबी प्रतिबंधों से यूरोप के देशों को बहुत अधिक नुक़सान हुआ है। इसके चलते रूस के ख़िलाफ़ प्रतिबंध जारी रखने या हटाने के बारे में उनके बीच गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं।

 

अनेक यूरोपीय संघ के सदस्य देश जो भारी आर्थिक नुक़सान उठा चुके हैं, अब रूस पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त किए जाने की मांग कर रहे हैं। इन देशों में मुख्य रूप से यूनान, साइप्रस, हंगरी, स्लोवेनिया, क्रोएशिया और स्पेन शामिल हैं। ये देश माॅस्को के संबंध में यूरोपीय संघ के वर्तमान रुख़ पर पुनर्विचार किए जाने की मांग कर रहे हैं। वास्तव में ये देश, रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों पर सहमति जताने पर विवश हो गए थे लेकिन अब उनकी नज़र में इस प्रक्रिया के जारी रहने का कोई औचित्य नहीं है। साइप्रस के विदेश मंत्री का कहना है कि माॅस्को को कई अंतर्राष्ट्रीय मामलों में यूरोपीय संघ का रणनैतिक साझेदार होना चाहिए। इस आधार पर अब यूरोपीय संघ के भीतर से रूस के संबंध में इस संघ के रवैये में परिवर्तन के लिए दबाव बढ़ने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। (HN)