अपनी क्षमता के अनुसार आतंकवाद का मुक़ाबला करते रहेंगेः अमरीका
अमरीकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि उनका देश अपनी क्षमता के अनुसार आतंकवाद विशेषकर दाइश का मुक़ाबला करता रहेगा।
डोनल्ड ट्रम्प ने अमरीकी कमांडरों के साथ बैठक में कहा कि हम अपनी क्षमता के अनुसार संसार को आतंकवाद से सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहेंगे।
अगर हम देखें तो पता चलता है कि आतंकवादी गुट दाइश, अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है विशेषकर मध्यपूर्व में। इराक़ और सीरिया में तो यह आतंकवादी गुट लगभग पूरी तरह से समाप्त होता जा रहा है। इन देशों में दाइश को पराजित कराने में ईरान तथा रूस के गठजोड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ईरान और रूस के गठजोड़ ने सीरिया और इराक़ को आतंकवादी गुटों विशेषकर दाइश को हराने में एेसे काम किये जो उल्लेखनीय हैं। दाइश को बुरी तरह से पराजित करने का सेहरा वैसे तो अमरीका अपने सर लेने के प्रयास में है किंतु वास्तव में एेसा है नहीं।
यदि इस बारे में ध्यान से देखा जाए तो सीरिया तथा इराक़ में बहुत से एेसे अवसर आए जहां पर अमरीका ने दाइश का मुक़ाबला करने के स्थान पर उसकी सहायता की है। उदाहरण स्वरूप इराक़ में जब वहां की सेना और स्वयंसेवी बलों ने मिलकर दाइश के विरुद्ध प्रभावी कार्यवही की और बड़ी संख्या में उनका विनाश किया और एेसा लगने लगा कि अब यहां से दाइश का खात़्मा सुनिश्चित है। एेसे में अमरीकी विमानों ने इराक़ी स्वयंसेवी बलों पर बमबारी कर दी ताकि पराजय का स्वाद चखने वाले दाइश के आतंकवादी, अपनी जान बचाकर वहां से भाग सकें और वास्तव में एेसी ही हुआ। इस प्रकार की घटनाएं एक बार नहीं बल्कि कई बार हुईं और यह घटनाएं केवल इराक़ में नहीं बल्कि सीरिया में भी घटीं। कुछ अवसरों पर अमरीका ने यह कहकर माफ़ी मांग ली कि उसके विमानों ने घोखे में यह बमबारी की थी और उसका उद्देश्य आम लोगों को मारना नहीं है।
इस प्रकार से कहा जा सकता है कि अमरीका अब भी आतंकवाद के विरुद्ध दोहरा मानदंड अपनाए हुए है जबकि उसका दावा है कि वह संसार से आतंकवाद के सफाए में लगा हुआ है।