रूस और चीन ने 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किये
अमेरिका की एक नीति चीन और रूस को आमने- सामने करना और इस मार्ग से वह चीन की शक्ति को कमज़ोर करना चाहता है।
रूस और चीन ने द्विपक्षीय सहकारिता के परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। इन समझौतों पर रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मिदवेदेव और उनके चीनी समकक्ष ली किकियांग ने हस्ताक्षर किये। इन समझौतों पर हस्ताक्षर एसी स्थिति में हुए हैं जब कहा यह जा रहा है कि आठ नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दृष्टि से इन समझौतों पर हस्ताक्षर विचारयोग्य है।
यद्यपि चीन के प्रधानमंत्री ने रूस के साथ अपने देश के संबंधों को स्ट्रैटेजिक बताया है पर प्रतीत यह हो रहा है कि दोनों देश विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर करके इन संबंधों की सतह को द्विपक्षीय सहकारिता से आगे ले जाना चाहते हैं और अमेरिका को यह संदेश दे दिया है कि चीन क्षेत्रीय सहकारिता का केन्द्र है और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी भूमिका निभाने के लिए उसके अंदर आवश्यक क्षमता मौजूद है।
अमेरिका की एक नीति चीन और रूस को आमने- सामने करना और इस मार्ग से वह चीन की शक्ति को कमज़ोर करना चाहता है। पूर्व सोवियत संघ के समय में अमेरिका ने चीन का प्रयोग सोवियत संघ के खिलाफ किया था और इस समय भी वह चीन को रूस के मुकाबले में खड़ा करने के प्रयास में है। इस प्रकार चीन और रूस के मध्य 20 समझौतों पर हस्ताक्षर एक प्रकार से अमेरिकी षडयंत्रों को विफल बनाने के एक प्रयास भी हैं।
इस समय उत्तर कोरिया संकट एक प्रकार से चीन और रूस के लिए संयुक्त चुनौती बन गया है और यूक्रेन एवं क्रीमिया को लेकर मास्को पर पश्चिम का दबाव भी है। इस आधार पर दोनों देश इस परिणाम पर पहुंचे हैं कि अगर अमेरिकी दबावों व हस्तक्षेपों के मुकाबले में समान दृष्टिकोण नहीं अपनायेंगे तो क्षेत्र में अमेरिका पूरी तरह से उनका परिवेष्टन कर लेगा।
बहरहाल बहुत से टीकाकारों का मानना है कि रूस पर पश्चिम का दबाव इस बात का कारण बना है कि रूस पूर्व के बारे में अपने दृष्टिकोण को पहले से अधिक मज़बूत करे और चीन भी द्विपक्षीय सहकारिता में विस्तार के लिए इस अवसर से लाभ उठाये। MM