दोनों कोरियाओं के बीच वार्ता, क्या जमी बर्फ़ पिघलेगी?
दक्षिणी कोरिया और उत्तरी कोरिया के प्रतिनिधिमंडल पैन्मुन्जोम नामक सीमावर्ती गांव में पहुंच गए और मंगलवार की सुबह से दोनों देशों के बीच वार्ता औपचारिक रूप से शुरू हो गई।
दो साल के अंतराल के बाद दोनों कोरियाओं के बीच होने वाला यह संपर्क कई आयामों से बहुत महत्वपूर्ण है। उत्तरी कोरिया ने विंटर ओलम्पिक में अपनी टीम दक्षिणी कोरिया भेजने की तत्परता की घोषणा करके वार्ता के लिए सार्थक पहल की जबकि दूसरी ओर दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए ईन ने इस मौक़े को गवांया नहीं और तत्काल इसका जवाब दिया और उत्तरी कोरिया की टीम की ओलम्पिक में भागीदारी की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
इस बात का आभास दोनों ही देशों के अधिकारियों को पूरी तरह है कि कोरिया प्रायद्वीप में हालात गंभीर रूप से तनावग्रस्त हैं यहां तक कि परमाणु युद्ध की संभावना को पूरी तरह ख़ारिज नहीं किया जा सकता।
अमरीका ने दोनों कोरियाओं के बीच वार्ता का स्वागत तो किया है लेकिन सच्चाई यह है कि अमरीका यह नहीं चाहता कि कोरिया का क्षेत्र तनाव से पूरी तरह मुक्त हो जाए। इसलिए कि शांति होने की स्थिति में अमरीकी सैनिक उपस्थिति सब को अनावश्यक महसूस होगी। दक्षिणी कोरिया को अच्छी तरह पता है कि यदि तनाव जारी रहना और अचानक कोई असामान्य स्थिति पैदा हो गई तो कितना बड़ा नुक़सान हो सकता है।
तेहरान में दक्षिणी कोरिया के राजदूत का कहना है कि दक्षिणी और उत्तरी कोरिया के बीच तनाव साठ साल से जारी है लेकिन इस तनाव को एक विशेष स्तर तक सीमित रखा गया था।
अब एसा लगता है कि दोनों देश एक बार फिर पुरानी स्थिति को बहाल करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि समस्याओं पर बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण बने।