जापान चाहता है अपना रवैया बदले उत्तरी कोरिया
जापान के प्रधानमंत्री शिन्ज़ो आबे ने कहा कि टोक्यो अपनी नीतियों के माध्यम से उत्तरी कोरिया का रवैया बदलने की कोशिश कर रहा है।
शिन्ज़ो आबे ने संसद में यह बात कही। आबे ने यह बात एसी स्थिति में कही है कि जब उत्तरी कोरिया के खिलाड़ियों की टीम दक्षिणी कोरिया में होने वाले विंटर ओलम्पिक में शामिल हो रही है। दोनों देशों के खिलाड़ियों ने एक ध्वज के तहत खेलने का निर्णय किया है। उत्तरी कोरिया की ओलम्पिक टीम में 24 खिलाड़ी होंगे जबकि उद्घाटन समारोह में उत्तरी कोरिया का 140 सदस्यीय म्युज़िकल ग्रुप भी शामिल होगा।
तनाव कम करने की प्रक्रिया उत्तरी कोरिया के शासक किम जोंग ऊन के उस बयान के बाद शुरू हुई जिसमें उन्होंने दक्षिणी कोरिया को वार्ता का प्रस्ताव दिया। उत्तरी कोरिया की इस पहल से दोनों देशों में जनता के स्तर पर ख़ुशी की भावना पैदा हुई लेकिन अमरीका ने बार बार इस बारे में संदेह जताया। अमरीका ने वार्ता का स्वागत भी किया लेकिन साथ ही कई भड़काऊ क़दम भी उठाए।
एसा लगता है कि अमरीका के दबाव में जापान भी इस प्रकार के बयान दे रहा है जिससे उत्तरी कोरिया नाराज़ हो सकता है। कोरिया प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने के लिए अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के बयानों को ज़िम्मेदार माना जाता है। ट्रम्प ने अपने ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानों और ट्वीट से हालात को काफ़ी ख़राब किया। मगर जापान के प्रधानमंत्री का अमरीका के रास्ते पर चलना इसलिए उचित नहीं है कि वह कोरिया का पड़ोसी देश है और क्षेत्र में तनाव का सीधा असर जापान पर पड़ेगा।
अमरीका और उसके घटक यदि इसी प्रकार ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान देते रहे तो निश्चित रूप से हालात ख़राब होंगे। जबकि आपसी बातचीत से तनाव को कंट्रोल किया जा सकता है। जापान के लिए ज़्यादा बेहतर यही है कि वह तनाव को कम करने वाले क़दम उठाए।