जासूस मामले पर यूरोप को माॅस्को का करारा जवाब
माॅस्को ने 23 देशों के 59 राजनयिकों को रूस छोड़ने का आदेश दे दिया है। यह इन देशों से रूसी कूटनयिकों के निष्कासन की जवाबी कार्यवाही है। इन 59 कूटनयिकों में से 41 यूरोपीय देशों के हैं।
रूस ने गुरुवार से जवाबी कार्यवाही शुरू की है और उसने सबसे पहले अपने देश से साठ अमरीकी कूटनयिकों को निकाल बाहर किया और सेंट पीटर्ज़बर्ग मेें अमरीकी वाणिज्य दूतावास को भी बंद कर दिया। माॅस्को की इस जवाबी कार्यवाही पर अनेक यूरोपीय देशों ने खिसयाहट भरी प्रतिक्रिया जताई है। यूरोपीय आयोग के प्रमुख ने कहा है कि माॅस्को के साथ गंभीर मतभेदों के बावजूद रूस की भूमिका को दृष्टिगत रखे बिना यूरोप के सुरक्षा मामलों के बारे में बात करना बड़ी ग़लती है।
अस्ल में यूरोपीय देशों को इस बात की आशा नहीं थी कि रूस उनके साथ भी वही कूटनयिक रवैया अपनाएगा जो उसने अमरीका के साथ अपनाया है। लेकिन कूटनैतिक जंग में ब्रिटेन और अमरीका का साथ देने वाले यूरोपीय देशों के साथ भी माॅस्को ने अत्यंत कड़ा रवैया अपना कर उन्हें सबक़ सिखा दिया है और अब यूरोपीय देशों में खलबली मची हुई है। इसी के साथ यह बात भी ध्यान योग्य है कि पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रीपल पर रासायनिक हमले के बहाने रूस के ख़िलाफ़ कूटनैतिक युद्ध के बारे में यूरोपीय देशों का रुख़ भी एक समान नहीं रहा है। हालांकि अधिकतर यूरोपीय देशों ने रूस के ख़िलाफ़ नीति अपनाई है लेकिन कई देश एेसे भी जिन्होंने रूसी कूटनयिकों को बाहर नहीं निकाला जिससे पता चलता है कि इस संबंध में यूरोपीय देश एकमत नहीं है।
बहरहाल रूस ने यूरोपीय देशों के कूटनयिकों को बाहर निकाल कर यह दिखा है कि वह पश्चिम की ग़लत नीतियों के सामने झुकने वाला नहीं है और इस तरह की नीतियों के ख़िलाफ़ वह ज़रूर जवाबी कार्यवाही करेगा। लेकिन इसी के साथ उसने हमेशा ही मतभेदों के समाधान और संबंधों की बहाली के लिए बात चीत की संभावना पर बल दिया है। (HN)