अमरीका में यमन युद्ध की समाप्ति की मांग
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यमन पर सऊदी अरब की सैन्य चढ़ाई आरंभ हुए तीन साल पूरे हो गए हैं और अमरीका में इस युद्ध की समाप्ति की मांग बढ़ती जा रही है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०२, २०१८ १०:२६ Asia/Kolkata

यमन पर सऊदी अरब की सैन्य चढ़ाई आरंभ हुए तीन साल पूरे हो गए हैं और अमरीका में इस युद्ध की समाप्ति की मांग बढ़ती जा रही है।

अमरीका के एक सिनेटर बर्नी सेंडर्ज़ ने एक बार फिर अमरीकी कांग्रेस से मांग की है कि वह यमन युद्ध में अमरीका की भागीदारी को रोके। उन्होंने यमन युद्ध में अमरीका के हस्तक्षेप को समाप्त कराने के लिए अमरीकी सांसदों विशेष कर डेमोक्रेट सांसदों की ओर से की जाने वाली कोशिशों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि कांग्रेस को काफ़ी पहले अपनी क़ानूनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए थी और इस संबंध में निर्णय का हक़ राष्ट्रपति को नहीं देना चाहिए था। कुछ हफ़्ते पहले भी यमन युद्ध में सऊदी अरब के साथ अमरीका के सैन्य सहयोग को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव के माध्यम से अमरीकी कांग्रेस में कोशिशें की गई थीं। इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि यमन की लड़ाई में अमरीकी सेना के हस्तक्षेप को कांग्रेस की अनुमति नहीं है और इसकी कोई वैधता नहीं है।

 

यमन युद्ध को शुरू हुए तीन साले पूरे हो चुके हैं और वाइट हाउस का दावा है कि वह सऊदी अरब के साथ केवल गुप्तचर सूचनाओं के संबंध में सहयोग कर रहा है जबकि एेसे अनेक ठोस प्रमाण मौजूद हैं कि यह सहयोग सूचनाओं के स्तर से काफ़ी आगे बढ़ चुका है। अमरीकी सरकार की ओर से देश के क़ानूनों के उल्लंघन के कारण ही कांग्रेस में बार बार यह मांग उठ रही है कि अमरीका को मध्यपूर्व की एक दूसरी अवांछित लड़ाई में शामिल होने से रोका जाए। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने पिछली सरकारों की यह कह कर अनेक बार आलोचना की है कि उन्होंने मध्यपूर्व के क्षेत्र के परिणामहीन युद्धों में खरबों डाॅलर की रक़म फूंक दी है लेकिन अब वे स्वयं भी उसी रहा पर चल रहे हैं। बहरहाल एेसा प्रतीत तो नहीं होता कि यमन युद्ध को लेकर राष्ट्रपति के अधिकारों पर खड़ा होेने वाला विवाद इतनी आसानी से समाप्त हो जाएगा। बर्नी सेंडर्ज़ ने कहा है कि यमन में दुनिया की सबसे बड़ी मानव त्रासदी उत्पन्न हो चुकी है और दसियों लाख लोगों को भूख और हैज़े का सामना है। इस प्रकार के संकट के मुक़ाबले में चुप रहना, अमरीकी कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है इस लिए यह आशा रखी जा सकती है कि यमन युद्ध के सिलसिले में अमरीकी सरकार के रवैय में परिवर्तन आ सकता है। (HN)