यूरोप कैसे ट्रम्प को ब्लाक कर सकता है?
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकल कर यूरोप को बहुत कठोर संदेश दिया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १७, २०१८ १३:५५ Asia/Kolkata
  • यूरोप कैसे ट्रम्प को ब्लाक कर सकता है?

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकल कर यूरोप को बहुत कठोर संदेश दिया है।

ट्रम्प प्रशासन ने केवल बहुपक्षीय समझौते का उल्लंघन ही नहीं किया है बल्कि उनका प्रशासन उन कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाना चाहता है जो ईरान में व्यापाकर कर  रही हैं। इसके साथ ही ट्रम्प ने यह धमकी भी दी है कि यूरोपीय देशों से अमरीका को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर भी वह एसा टैक्स लगा देंगे जिनसे कंपनियों को नुक़सान पहुंचेगा। अब यह स्थिति है कि यूरोप अमरीका के ख़िलाफ़ जवाबी कार्यवाही करने पर मजबूर है।

जर्मनी के वित्त मंत्री पीटर आल्टमायर ने कहा है कि उनकी सरकार सभी संबंधित कंपनियों से बात कर रही है कि अमरीका के प्रतिबंधों से उनके व्यापार को पहुंचने वाले नुक़सान को सीमित किया जा सकता है। फ़्रांस के वित्त मंत्री ब्रुनो ली माएर ने यूरोप की भावनाओं को बयान करते हुए कहा कि अमरीकी प्रतिबंधों के आर्थिक प्रभाव उसे दुनिया का वित्तीय पुलिस मैन बनाते हैं और यह चीज़ स्वीकार्य नहीं है।

इस समय यूरोपीय संघ और ईरान इस समय 9 सूत्रीय योजना पर काम कर रहे हैं जो ईरान को तेल और गैस की बिक्री सरलता से जारी रखने, यूरोपीय कंपनियों को सुरक्षित रखने तथा विशेष वित्तीय चैनल विकसित करने की रास्ता साफ़ करेगी। मगर इस बारे में बयान तो आए हैं, ज़मीनी सतह पर कुछ करने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है।

अब जब अमरीका परमाणु समझौते से बाहर निकल चुका है और अमरीका तथा यूरोप दो अलग अलग रास्तों पर चलना चाहते हैं तो दो संभावित रास्ते मौजूद हैं। एक स्थिति यह हो सकती है कि यूरोप ख़ुद को सुलह सफ़ाई के साथ अमरीका से अलग कर ले मगर इसके लिए यह सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा कि अमरीका के प्रतिबंधों से यूरोपीय कंपनियों को छूट मिल जाएगी। छूट पाने वाली कंपनियां ईरान में व्यापार कर सकेंगी और उन्हें अमरीकी जुर्माने का सामना नहीं करना पड़ेगा। मगर ट्रम्प ने जो घोषणा की है उससे साफ़ है कि अमरीका ईरान की अर्थ व्यवस्था को नुक़सान पहुंचाने के लिए अपने प्रतिबंधों की धार तेज़ कर रहा है।

यदि यूरोपीय कंपनियों पर जुर्माना लगा तो यूरोप के लिए ज़रूरी हो जाएगा कि वह भी धारदार योजनाएं तैयार करे। मगर इसके लिए एक वैधानिक नेटवर्क तैयार करना होगा ताकि अमरीका के प्रतिबंधों से यूरोपीय कंपनियों को पहुंचने वाला नुक़सान बहुत सीमित हो जाए।

यूरोपीय नेता ब्लाकिंग रेग्युलेशन को बहाल कर सकता है। इस प्रक्रिया को पिछले दो दशकों के दौरान इस्तेमाल नहीं किया गया है। फ़्रांस के वित्त मंत्री ने कहा है रेग्युलेशन की बहाली एजेंडे की प्राथमिकता में है।

आख़िरी बार वर्ष 1996 में यूरोप को अमरीका के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस क़ानून का सहारा लेना पड़ा था। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने काउंसिल रेग्युलेशन नंबर 2271 पास किया जिसका लक्ष्य यूरोपीय कंपनियों को अमरीका के प्रतिबंधों के नुक़सान से बचाना था। इसमें यह प्रावधान भी है कि यदि किसी अमरीकी संस्था ने यूरोपीय कंपनी को नुक़सान पहुंचाया तो उस कंपनी को यूरोप में नुक़सान की भरपाई मांगने का अधिकार होगा। इस नुक़सान की भरपाई यूरोप में मौजूद अमरीकी संपत्ति को ज़ब्त करके अदा किया जाएगा। लेकिन इस हर्जाने की मात्रा 5 लाख यूरोप से अधिक नहीं है।

वर्ष 1996 में यह रेग्युलेशन यूरोप के एक व्यापक कैंपेन के तहत लाया गया था जिसमें अमरीका के ख़िलाफ विश्व व्यापार संघ में शिकायत करने का भी प्रावधान है। इन दोनों प्रावधानों से यूरोप को तत्कालीन क्लिंटन सरकार से वार्ता करने में एक अच्छी पोज़ीशन हासिल हो गई थी। आख़िर में दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई थी और अमरीका ने यूरोपीय कंपनियों पर प्रतिबंध न लगाने का फ़ैसला किया था।

इस समय भी यूरोप के पास यह एक प्रभावी उपाय है। अब अगर यूरोपीय देशों ने इस क़ानून में समुचित बदलाव कर लिया और जवाबी कार्यवाही की तो यह अमरीकी प्रतिबंधों से ख़ुद को बचाने के लिए यूरोप के पास अच्छा रास्ता होगा।

अगर यूरोपीय अधिकारियों ने एसा किया तो यूरोप से ट्रम्प प्रशासन को बहुत कड़ा संदेश जाएगा कि यूरोप ने अपने हितों की रक्षा का संकल्प कर लिया है। जनवरी महीने में यूरोपीय कंपनियों के कार्यकारी अधिकारियों पर किए गए सर्वे से पता चलता है कि आधी से अधिक कंपनियां यह इरादा रखती हैं कि यदि ब्लाकिंग रेग्युलेशन में समुचित बदलाव हो जाते हैं तो ईरान में निवेश के फ़ैसले पर इसका सकारात्मक असर होगा।

इस रेग्युलेशन से मल्टीनैशनल कंपनियों की स्थिति भी मज़बूत होगी जो अमरीका और ईरान दोनों देशों में व्यापार करती हैं।

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को जिनका सकल घरेलू उत्पाद संयुक्त रूप से अमरीका की जीडीपी के बराबर है, सबसे पहले यह साबित करना होगा उनके भीतर अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति मौजूद है और वह अमरीका से उसी की ज़बान में बात कर सकते हैं।

साभार फ़ारेन पालीसी