अमेरिका ने मानवाधिकार के हनन बहाने तेहरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाया
https://parstoday.ir/hi/news/world-i64068-अमेरिका_ने_मानवाधिकार_के_हनन_बहाने_तेहरान_के_खिलाफ_प्रतिबंध_लगाया
इससे पहले अमेरिकी वित्तमंत्रालय ने इस देश के परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान के सेन्ट्रल बैंक के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाया था और उसके बाद पांच ईरानियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ३१, २०१८ १३:१५ Asia/Kolkata

इससे पहले अमेरिकी वित्तमंत्रालय ने इस देश के परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान के सेन्ट्रल बैंक के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाया था और उसके बाद पांच ईरानियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

अमेरिका के एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद कुछ चरणों में उसने ईरान के विरुद्ध नये प्रतिबंधों की घोषणा की है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति कोई नया विषय नहीं है और जब से ईरान की इस्लामी क्रांति सफल हुई है तब से तेहरान के खिलाफ यह नीति जारी रही है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने आठ मई वर्ष 2018 को परमाणु समझौते से निकलने के बाद घोषणा की थी कि तेहरान के विरुद्ध प्रतिबंधों को दोबारा लगाया जायेगा और इसी प्रकार ईरान के खिलाफ कुछ नये प्रतिबंध भी लगाये जायेंगे।

इसी परिप्रेक्ष्य में अमेरिका के वित्तमंत्रालय ने बुधवार को ईरान की राजनीतिक और वैज्ञानिक हस्तियों और इसी प्रकार कुछ ईरानी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध की घोषणा की।

अमेरिकी वित्तमंत्रालय ने ईरान में मानवाधिकार के हनन को इन प्रतिबंधों का बहाना बनाया है। इससे पहले अमेरिकी वित्तमंत्रालय ने इस देश के परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान के सेन्ट्रल बैंक के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाया था और उसके बाद पांच ईरानियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

अमेरिकी वित्तमंत्रालय के दावे के अनुसार इन पांचों व्यक्तियों का संबंध ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से है।

प्रतिबंध लगाने से अमेरिका का लक्ष्य ईरान की इस्लामी व्यवस्था पर दबाव डालना है ताकि वह वर्चस्ववाद विरोधी नीतियों को बदलने पर बाध्य हो जाये। यह वह विषय है जो अमेरिका की समस्त चालों व शत्रुता के बावजूद आज तक न तो व्यवहारिक हुआ है और न होगा।

अमेरिकी राजनेताओं ने इस देश की विभिन्न सरकारों में ईरान की इस्लामी क्रांति को रोकने के लिए प्रतिबंध के हथकंडे का प्रयोग किया परंतु इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली और इस्लामी क्रांति यथावत आगे बढ़ रही है।

इस बीच जो चीज़ वास्तविकता के रूप में इतिहास में पंजीकृत हो चुकी है वह यह है कि ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का आदेश देने वाले चले गये और ईरान की इस्लामी व्यवस्था दिन प्रतिदिन मज़बूत हो रही है और अपने स्थान पर बाकी है। MM