माइक पोम्पियो ने फिर ईरान विरोधी राग अलापा
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रोचक बात यह है कि गत चालिस वर्षों से अमेरिकी अधिकारी ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म करने के लिए नई- नई चालें चलते रहे हैं पर आज तक उनका यह स्वप्न साकार न हो सका।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug ०६, २०१८ १४:५४ Asia/Kolkata

रोचक बात यह है कि गत चालिस वर्षों से अमेरिकी अधिकारी ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म करने के लिए नई- नई चालें चलते रहे हैं पर आज तक उनका यह स्वप्न साकार न हो सका।

8 मई 2018 को परमाणु समझौते से अमेरिका के निकल जाने के बाद इस देश के अधिकारियों ने ईरान पर अधिक से अधिक दबाव बनाने की नीति अपना रखी है।

साथ ही अमेरिकी अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर ईरान के खिलाफ मानसिक युद्ध भी आरंभ कर रखा है ताकि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे ईरान को अलग- थलग कर सकें।

इसी तरह ईरान के खिलाफ कार्यवाहियों से अमेरिकी अधिकारियों का एक लक्ष्य क्षेत्र में ईरान के व्यवहार को बदलना है और अंततः वे ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म कर देने की कुचेष्टा में हैं।

रोचक बात यह है कि गत चालिस वर्षों से वे ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म करने के लिए नई- नई चालें चलते रहे हैं पर आज तक उनका यह स्वप्न साकार न हो सका।

अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने एक बार फिर तेहरान के खिलाफ निराधार दावा करते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ प्रतिबंध उस समय तक जारी रहेंगे जब तक वह अपना रवइया नहीं बदल लेता और प्रतिबंधों का लक्ष्य ईरान के विनाशकारी रवइये से मुकाबला करना है।

साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक है और वाशिंग्टन ईरानी कार्यवाहियों को बंद करना चाहता है। पोम्पियो ने इससे पहले ट्रम्प के सुर में सुर मिलाते हुए ईरान पर आतंकवाद का समर्थन करने और मध्यपूर्व में विनाशकारी कार्यवाहियों को अंजाम देने का आरोप लगाया था।

जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से उन्होंने ईरान पर मिसाइल कार्यक्रम के बहाने परमाणु समझौते के उल्लंघन, क्षेत्र को अस्थिर बनाने और आतंकवादी गुटों के समर्थन का आरोप लगाया है।

इन सबके बावजूद क्षेत्र में मौजूद वास्तविकतायें और अमेरिकी अधिकारियों की स्वीकारोक्ति इस बात की सूचक हैं कि वास्तविकता कुछ और है। ईरान ने हालिया कुछ वर्षों में आतंकवादी और अतिवादी गुटों से मुकाबले में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

आतंकवादी गुट दाइश और दूसरे आतंकवादी गुट सीरिया और इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के सीधे समर्थन की छत्रछाया में परवान चढ़े और क्षेत्र एवं विश्व में उन्होंने जघन्य अपराध अंजाम दिये हैं।

यह वह चीज़ है जिसे स्वयं ट्रम्प ने स्वीकार किया है। यही नहीं अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनावी प्रचार के दौरान कहा था कि बराक ओबामा और हिलैरी क्लिंटन ने दाइश को बनाया था।

बहरहाल ईरान ने इराक और सीरिया में आतंकवाद से मुकाबले में ध्यान योग्य भूमिका निभाई है इस प्रकार से कि इन दोनों देशों के अधिकारियों ने आतंकवाद से मुकाबले में ईरान की रचनात्मक भूमिका की बारमबार सराहना की है। MM