अमेरिका ताक़त के बल पर शांति स्थापित करेगाः ट्रंप
पोम्पियो ने दावा किया कि यद्यपि इस बात की आशंका मौजूद है कि ट्रंप सरकार दूसरे युद्ध में कूद पड़े परंतु स्पष्ट है कि अमेरिकियों के पास ऐसा राष्ट्रपति है जो अमेरिका की सैन्य शक्ति के प्रयोग में संकोच से काम नहीं लेगा।
अमेरिका ने 11 सितंबर की घटना के बाद 2001 में आतंकवाद से मुकाबले के बहाने अफ़ग़ानिस्तान और इराक पर हमला किया था और इन दोनों देशों पर कब्ज़ा कर लिया। अमेरिका के इस हमले से क्षेत्र में उसकी सैन्य उपस्थिति और मज़बूती की भूमि प्रशस्त हो गयी।
जिस तरह से सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ जाने और इराक एवं सीरिया में आतंकवादी गुटों की गतिविधियों में वृद्धि के बाद अमेरिका ने आतंकवाद से मुकाबले के बहाने एक बार फिर इन दोनों देशों में अपनी गैर कानूनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर लिया।
इन सब वास्तविकताओं के बावजूद अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि अमेरिका एक बार फिर मध्यपूर्व में दोबारा सैन्य युद्ध में कूदने का इरादा नहीं रखता है।
पोम्पियो ने इसी प्रकार दावा किया कि यद्यपि इस बात की आशंका मौजूद है कि ट्रंप सरकार दूसरे युद्ध में कूद पड़े परंतु स्पष्ट है कि अमेरिकियों के पास ऐसा राष्ट्रपति है जो अमेरिका की सैन्य शक्ति के प्रयोग में संकोच से काम नहीं लेगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस शक्ति के प्रयोग करने की इच्छा भी नहीं रखते।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर वर्ष 2017 में कहा था कि अमेरिका ताक़त के बल पर शांति स्थापित करेगा।
इस आधार पर पूरी तरह स्पष्ट है कि अमेरिका सैन्य शक्ति का प्रयोग करके अपनी इच्छानुसार शांति स्थापित करना चाहता है।
सीरिया में उसकी ग़ैर कानूनी उपस्थिति और इसी तरह क़तर की अलअदीद सैनिक छावनी में लगभग 11 हज़ार अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM