आसेआन के रक्षा मंत्रियों की सिंगपुर बैठक
आसेआन के सदस्य देशों तथा घटक देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक सिंगापुर में हुई जिसमें दक्षिणी चीन सागर में तनाव कम करने पर ज़ोर दिया गया।
इस दो दिवसीय बैठक में अमरीका, चीन, दक्षिणी कोरिया, जापान, न्यूज़ीलैंड, भारत, रूस और आस्ट्रेलिया आसेआन के घटक देशों के रूप में उपस्थित हैं। बैठक में इस बात की चर्चा हुई कि क्षेत्रीय देशों के सैनिक विमानों की आवाजाही की क्या प्रक्रिया हो और इसे किस तरह व्यवस्थित किया जाए कि तनाव में कमी आए। दक्षिणी चीन सागर के इलाक़े में वियतनाम, फिलिपीन, मलेशिया, ब्रुनई तथा ताइवान से चीन के कुछ मतभेद हैं और अमरीका तथा चीन के बीच बढ़ते तनाव से आसेआन देशों की चिंता और भी बढ़ गई है। इस इलाक़े मे अमरीका की गतिविधियों से तनाव लगातार बढ़ रहा है।
आसेआन को सफल क्षेत्रीय संगठनों में गिना जाता है लेकिन यह भी सच्चाई है कि इसके गठन को लगभग पांच दशकों का समय बीत रहा है औज्ञ यह संगठन कई महत्वपूर्ण चुनौतियों से जूझ रहा है। इलाक़े में बाहरी शक्तियों की उपस्थिति ने तनाव और टकराव बढ़ाया है।
सिंगापुर बैठक में चीन और अमरीका के रक्ष मंत्रियों की मुलाक़ात भी हुई जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि दक्षिणी चीन सागर के इलाक़े में तनाव कम करने के लिए यह दोनों देश ज़रूरी उपाय करेंगे मगर यह स्पष्ट नहीं है कि ताइवान को अमरीका की ओर से हथियारों की बिक्री से चीन की बढ़ती आपत्ति के मामले को हल करने का कोई रास्ता किस प्रकार निकलेगा।
आसेआन के देश चीन के साथ अपने विवाद को हल करने की दिशा में सकारात्मक क़दम उठा सकते हैं मगर इस मार्ग में अमरीका एक बड़ी रुकावट है। अमरीका की समस्या यह है कि इलाक़े के कई देशों को वह अपना घटक कहता है मगर साथ ही इन देशों को वह चीन पर अंकुश लगाने के लिए प्रयोग भी करना चाहता है और यह बुनियादी लक्ष्य अनेक प्रकार के तनावों का कारण बन रहा है।