यूरोपीय देशों ने सऊदी अरब की तीव्र भर्त्सना की
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तीन यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को एक विज्ञप्ति जारी करके सऊदी पत्रकार के मारे जाने की तीव्र भर्त्सना की और बल देकर कहा है कि किसी भी बहाने से सऊदी पत्रकार की हत्या का औचित्य नहीं दर्शाया जा सकता।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २२, २०१८ १७:२७ Asia/Kolkata

तीन यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को एक विज्ञप्ति जारी करके सऊदी पत्रकार के मारे जाने की तीव्र भर्त्सना की और बल देकर कहा है कि किसी भी बहाने से सऊदी पत्रकार की हत्या का औचित्य नहीं दर्शाया जा सकता।

पश्चिमी देशों के साथ संबंध रखने को सऊदी अरब सदैव अपने लिए एक गर्व की बात समझता था परंतु अब उसे इस देश की राजशाही सरकार के विरोधी सऊदी पत्रकार की हत्या पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना है।

विश्व समुदाय सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के विभिन्न आयामों के स्पष्ट होने का इच्छुक है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब के इस अपराध के खिलाफ प्रतिक्रिया में वृद्धि होती जा रही है।

इस परिप्रेक्ष्य में सऊदी अरब के घटक यूरोपीय देशों ने भी इस संबंध में कड़ा दृष्टिकोण अपना लिया है।

सऊदी अरब ने दो सप्ताह के कड़े दबाव के बाद शनिवार को स्वीकार कर लिया कि सऊदी पत्रकार जमाल खाशुकजी की हत्या तुर्की के इस्तांबोल नगर में स्थित उसके काउंसलेट में हो गयी परंतु साथ ही उसने दावा किया कि काउंसलेट के अंदर होने वाली लड़ाई में वे मारे गये और इसकी जानकारी सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान को नहीं थी।

तीन यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को एक विज्ञप्ति जारी करके सऊदी पत्रकार के मारे जाने की तीव्र भर्त्सना की और बल देकर कहा है कि किसी भी बहाने से सऊदी पत्रकार की हत्या का औचित्य नहीं दर्शाया जा सकता।

इसी प्रकार तीनों यूरोपीय देशों की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में सऊदी अरब का आह्वान किया गया है कि वह वास्तविकता के स्पष्ट होने और ज़िम्मेदारों को ज्ञात होने तक इस संबंध में जांच को जारी रखे।

दूसरे शब्दों में तीनों यूरोपीय देशों ने सऊदी अरब को चेतावनी दी है कि वास्तविकता को छिपाने हेतु रियाज के प्रयास से सऊदी अरब के साथ इन देशों के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अलबत्ता यूरोप के इस दृष्टिकोण का कारण भी स्पष्ट है। यूरोपीय सरकारें मानवाधिकार के संबंध में सऊदी अरब के अतीत से भली-भांति अवगत हैं और मानवाधिकार के संगठनों व संस्थाओं ने सऊदी अरब द्वारा मानवाधिकार के हनन और निर्दोष यमनी जनता की हत्या के संबंध में जो रिपोर्टें जारी की हैं उसे इन देशों ने देखा है।

इस आधार पर यूरोपीय देशों ने सऊदी अरब के संबंध में जो कड़ा रवइया अपना रखा है उसका कारण पश्चिम और यूरोप में आम जनमत का दबाव है।

आम- जनमत के दबाव का परिणाम ही है कि जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल ने सऊदी पत्रकार की हत्या की भर्त्सना की और कहा है कि जब तक इस हत्या के आयाम स्पष्ट नहीं हो जाते तब तक बर्लिन सऊदी अरब के हाथों किसी प्रकार का हथियार नहीं बेचेगा।

बहरहाल इस बात को देखना चाहिये कि पश्चिमी और यूरोपीय देश सऊदी पत्रकार की हत्या के मामले में किस सीमा तक आगे बढ़ते हैं जबकि अनुभव इस बात के सूचक हैं कि उन्होंने सदैव सऊदी अरब द्वारा किये जा रहे अपराधों और मानवाधिकार के हनन की अनदेखी की है।

सऊदी अरब द्वारा यमन में किये जा रहे अपराधों पर पश्चिमी देशों की अर्थपूर्ण चुप्पी को इसी दिशा में देखा जा सकता है। MM