ब्राज़ील आख़िर आत्महत्या क्यों करना चाहता है?
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रविवार को ब्राज़ील में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में यह बात लगभग तय हो चकी है कि दक्षिणपंथी नेता जायर बोलसूनारू सत्ता में आ जाएंगे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २७, २०१८ १५:४९ Asia/Kolkata
  • ब्राज़ील आख़िर आत्महत्या क्यों करना चाहता है?

रविवार को ब्राज़ील में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में यह बात लगभग तय हो चकी है कि दक्षिणपंथी नेता जायर बोलसूनारू सत्ता में आ जाएंगे।

ब्राज़ील दक्षिणी अमरीका का सबसे बड़ा देश और दुनिया का चौथा बड़ा लोकतंत्र है किन्तु अब इस बात की अशंका बढ़ गयी है कि यह सम्मान और रुतबा ब्राज़ील के पास अधिक समय तक बाक़ी न रह सके क्योंकि जायर बोलसूनारू  सैन्य तानाशाह की खुले शब्दों में प्रशंसा कर चुके हैं किन्तु अभी वोटों का महत्व अपनी जगह मौजूद है और लगता है कि वह इनमें से अधिकतर प्राप्त कर लेंगे।

वास्तव में इस महीने के आरंभ में होने वाले पहले चरण के मतदान में जायर बोलसूनारू 46 प्रतिशत से भी अधिक वोट प्राप्त करके जीत के बिल्कुल निकट पहुंच चुके हैं जबकि उनके प्रतिद्वंदी फ़र्नाडो हैडड दूसरे नंबर पर हैं जिन्होंने केवल 29 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे।

जायर बोलसूनारू ने अपने जिन दृष्टिकोणों का खुलकर एलान किया है उससे उनके महिला विरोधी और नस्लभेदी होने का पता चलता है। वह पर्यावरण दोस्ती के बहुत बड़े दुश्मन हैं और अमाज़ोन के जंगलों की कटाई के विस्तार को तैयार हैं। वह हर घर तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने अपना रुख़ तेज़ी से नियो लेब्रल अर्थव्यवस्था की ओर मोड़ा है और शिकागो के विश्वविद्यालय में उनके एडवाइज़र ब्राज़ील के सरकारी विभाग के पूर्ण निजीकरण की योजना तैयार किए बैठे हैं। विदित रूप से राष्ट्र का औद्योगिक वर्ग इस लक्ष्य के लिए उनके साथ है किन्तु इनमें से किसी भी चीज़ से पता नहीं चलता कि वह जनता में लोकप्रिय क्यों हैं। उनको वोट देने वालों में से ऐसे कई हैं जो उनके बयानों की निंदा करते हैं किन्तु आशा लगाए बैठक हैं कि सत्ता की वास्तविकताएं उन्हें उनके बदतर इरादों से रोक देंगी किन्तु उन्हें अधिक आशाएं नहीं रखनी चाहिए।

उनके और डोनल्ड ट्रम्प के बीच काफ़ी चीज़ें एक जैसी हैं किन्तु भले ही अमरीका के चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था अपर्याप्त हो किन्तु यह कम से कम काम अवश्य करता है किन्तु इस हवाले से ब्राज़ील से संबंधित कम कम ही आशा रखी जा सकती है जो अमरीकी नवाज़ जनरलों की दो दश्कों की तानाशाही के बाद लोकतंत्र में केवल 1980 के दशक में ही ढलना शुरु हुआ है। इन जनरलों का लौह हाथ देश के मामले से लेकर पूरे क्षेत्र में समान विचार रखने वाली सरकारों के साथ सहयोग तक फैला रहा जिसमें चिली में आगस्टू पेनेशीट की अधीन सरकार भी शामिल है।

चिली में 1964 का सैन्य विद्रोह एक ऐसे राष्ट्रपति के विरुद्ध था जिसके बारे में बहुत अधिक दक्षिणपंथियों का मानना था कि वह बहुत वामपंथी हैं। 4 दशकों बाद पीटी के लूला डिसिल्वा का सत्ता में आन इन लोगों के चेहरों पर ज़ोरदार थप्पड़ की तरह लगा होगा जो जायर बोलसूनारू सहित सहित फांसीवादी अतीत को उदाहरणीय क़रार देते हैं। जायर बोलसूनारू पूर्व सैनिक कैप्टन हैं जिन्होंने बदनाम होकर सेना छोड़ दी किन्तु हालिया कुछ समय पहले तक भी ब्राज़ील  की राजनीति में बहुत ही दक्षिणपंथी गलियारों में हस्यास्पद माने जाते थे।

भले ही लूला को सही रूप से इस गुलाबी लहर (सोशलिस्ट आंदोलन) का भाग क़रार दिया जाता है जिसमें वेन्ज़ुएला में ह्यूगू शावेज़ के सत्ता में आने के बाद लैटिन अमरीका को अपनी लपेट में लेना शुरु किया किन्तु फिर भी लूला का सुधारवाद ह्यूगो शावेज़ की कार्यवाहियों की तुलना में बहुत संतुलित था जिसके कारण से लूला को वामदलों के बुद्धिजीवियों की अप्रसन्नता का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने व्यापक स्तर पर नवीन विभाजन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम किया जिससे वंचितों की काफ़ी मदद हुई और जब उन्होंने 2 बार समयवाधि पूरी करने के बाद सत्ता अपनी सरकार की डिल्मा रोसेफ़ को सौंपी तो उस समय उनकी लोकप्रियता अद्वितीय रूप से 84 प्रतिशत थी जिसके कारण अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी जलकर बयान देने लगे।

जब 2016 में व्यक्तिगत भ्रष्टाचार के बजाए बजट के तकनीकी मामलों पर रोसेफ़ के विरुद्ध महाभियोग चलाया गया। तो उस समय भी लूला एक बार फिर राष्ट्रपति प्रत्याशी के रूप में सामने आए और आम जनमत के सर्वे यह दिखाने लगे कि वह आसानी से जीत जाएंगे किन्तु उन्हें इसका अवसर नहीं दिया गया क्योंकि जारी वर्ष के आरंभ में भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें जेल भेज दिया गया। उन पर जो आरोप लगे उनमें से एक मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने एक निर्माणाधीन फ़र्म को सुविधाएं देने के बदले एक मुफ़त अपार्टमेंट प्राप्त किया। जब एक बार अदालतों ने लूला को प्रत्याशी के रूप में अयोग्य क़रार दिया तो पीटी ने सावपालो के पूर्व मेयर फ़र्नाडो हैडड को राष्ट्रपति पद के लिए नामज़द कर दिया।

यह समझना अधिक मुश्किल नहीं कि वोटर क्यों अपना जोशो जज़्बा लूला के बजाए हैडड को स्थानांतरित करने में हिचकिचाएंगे क्योंकि हैडड में लूला जैसा करिश्मा नहीं और न ही उनका रिकार्ड लूला जितना प्रभावी है। इससे अधिक मुश्किल एक फांसीवाद को प्राप्त लोकप्रियता समझना है जिसके अंतर्गत ब्राज़ील शायद इसी अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में शामिल हो जाएगा कि जिसमें रोड्रेगो डियोट्रेटे के अधीन फिलीपीन है।

ज़ाहिर है कि कई समानताएं भी हैं जो जायर बोलसूनारू के समर्थक स्टीफ़न बेनन अच्छी तरह जानते हैं कि जो ट्रम्प के वाइट हाऊस और ब्रेट बार्ट मीउया में रह चुके हैं और जिन की सारी शक्तियां इस समय यूरोप में फांसीवाद को नवजीवन प्रदान करने में व्यस्त हो रही हैं।

शायद सबसे से अहम सवाल यह है कि लंबे समय से ब्राज़ीली समाज में मौजूद अपराधिक हिंसा और राजनैतिक भ्रष्टाचार से छुटकारा पाने की चाह में ब्राज़ीलियों की ज़्यादातर संख्या क्यों ऐसे व्यक्ति के समर्थन में उतर आई है जो मनुष्य की बदतरीन प्रवृत्ति में रूझान रखता है।

विदित रूप से वह ऐसे पहले वोटर नहीं जिन्हें इस रास्ते के लिए मना लिया गया है और खेद की बात यह है कि वह ऐसे आख़िरी भी नहीं होंगे किन्तु आने वाले वर्षों में बहुत खेद करने के अवसर भी कम न होंगे। (AK)