इराकी प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से मुकाबले पर बल दिया
इराक के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ष 2017-18 का नाम इराक में दाइश की मौत का नाम दिया था।
इराक के नये प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ सैनिक कमांडरों से भेंट में आतंकवादी गुटों के खिलाफ़ लड़ाई के जारी रहने और आतंकवाद के समूल नष्ट होने तक उसके जारी रहने पर बल दिया है।
आदिल अब्दुल मेहदी ने कहा कि सेना और सुरक्षा बलों का दायित्व जनता का समर्थन है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इराक के सशस्त्र सुरक्षा बलों की कुर्बानी आतंकवादी गुटों पर उनकी विजय का कारण बनी है।
आतंकवादी गुट दाइश ने कुछ देशीय तत्वों और दूसरे देशों के समर्थन के कारण वर्ष 2014 से इराक के विभिन्न क्षेत्रों पर कब्ज़ा लिया था और जिन क्षेत्रों पर उसने कब्ज़ा किया था वहां उसने जघन्य अपराध अंजाम दिया।
आतंकवादी गुट दाइश आरंभ में यह सोच रहा था कि शीघ्र ही वह पूरे इराक पर कब्ज़ा कर लेगा परंतु इराक के वरिष्ठतम धर्मगुरू की दूरगामी सोच व होशियारी और इराकी जनता व सरकार की एकजुटता से दाइश के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी और इराकी सुरक्षा बलों ने स्वयं सेवी बल "हश्दुश्शाबी" के साथ मिलकर दाइश के कब्ज़े वाले क्षेत्रों को स्वतंत्र करा लिया।
इन बलों को आतंकवादी गुट दाइश के मुकाबले में जो सफलता मिल रही थी उसके दृष्टिगत इराक के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ष 2017-18 का नाम इराक में दाइश की मौत का नाम दिया था।
हालिया वर्षों में इराक से दाइश का अंत हो गया परंतु उसके अंत का यह अर्थ नहीं है कि पूर्णरूप से उसका सफाया हो गया।
दूसरे शब्दों में सैनिक दृष्टि से इराक में दाइश का सफाया हो गया परंतु सवाल यह है कि क्या इराकी आतंकवाद से मुक्ति पा जायेंगे? या यह आतंकवादी व तकफीरी गुट किसी दूसरे रूप में प्रकट होंगे और इराकी जनता को आतंकवादी हमलों का सामना होगा?
इराक के कुछ क्षेत्रों में छिट-पुट आतंकवादी हमले इस बात के सूचक हैं कि आतंकवादी अब भी इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं और इराक के नये प्रधानमंत्री ने आतंकवादियों से मुकाबला जारी रहने पर जो बल दिया है उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM