पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सऊदी अरब के बाद चीन क्यों गये?
https://parstoday.ir/hi/news/world-i69595-पाकिस्तान_के_प्रधानमंत्री_सऊदी_अरब_के_बाद_चीन_क्यों_गये
काबुल में राजनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ अब्दुल्लतीफ नज़री ने कहा है कि चीन पाकिस्तान की जो सहायता करना चाहता है उसका एक कारण यह है कि अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों के बारे में चीन की जो नीति है पाकिस्तान ने उसका समर्थन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०३, २०१८ १७:१७ Asia/Kolkata

काबुल में राजनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ अब्दुल्लतीफ नज़री ने कहा है कि चीन पाकिस्तान की जो सहायता करना चाहता है उसका एक कारण यह है कि अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों के बारे में चीन की जो नीति है पाकिस्तान ने उसका समर्थन किया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बीजींग में चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग से द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार के बारे में विचार -विमर्श किया है।

साथ ही उन्होंने बीजींग द्वारा इस्लामाबाद को 6 अरब डालर का पैकेज दिये जाने के बारे में भी बात- चीत की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने लगभग दो महीने पहले सत्ता की बागडोर ऐसी स्थिति में संभाली है जब इस्लामाबाद को आर्थिक दृष्टि से विषम आर्थिक कठिनाइयों का सामना है और वह पाकिस्तान को आर्थिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं जबकि पाकिस्तान में कुछ राजनीतिक हल्कों का मानना है कि कुछ सरकारें इस विषय को इसलिए उछाल रही हैं ताकि वह ऋण के बदले में इस्लामाबाद से विशिष्टता प्राप्त कर सकें।

सऊदी अरब ने इस्लामाबाद को जो 12 अरब डालर की सहायता देने का वचन दिया है उसकी पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने कड़ी आलोचना की है और इन पार्टियों का कहना है कि एसा हो ही नहीं सकता कि सऊदी अरब किसी प्रकार की शर्त के बिना इतनी बड़ी सहायता पाकिस्तान को एसे ही दे दे।

काबुल में राजनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ अब्दुल्लतीफ नज़री ने कहा है कि चीन पाकिस्तान की जो सहायता करना चाहता है उसका एक कारण यह है कि अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों के बारे में चीन की जो नीति है पाकिस्तान ने उसका समर्थन किया है।

इसी प्रकार चीन, पाकिस्तान की जो सहायता कर रहा है उसका एक कारण अमेरिका द्वारा भारत का समर्थन है। चीन भारत के पारंपरिक प्रतिद्वन्द्वी पाकिस्तान की सहायता करके उसे अपने साथ रखना चाहता है जबकि अमेरिका भारत का समर्थन करके एशिया में चीन के मुकाबले में गम्भीर प्रतिस्पर्धी खड़ा करना और उसके माध्यम से चीन पर कड़ी नज़र रखना चाहता है।

चीन और पाकिस्तान ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय संबंधों को विस्तृत किया है और चीन अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय परिवर्तनों को इस्लामाबाद की दृष्टि से देखता है।

चीन ने हालिया वर्षों में अफगानिस्तान में भी अपनी आर्थिक उपस्थिति को मज़बूत किया है और वह अफगानिस्तान की राजनीतिक शांति प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका निभाना चाहता है।

पाकिस्तान के पूर्व विदेशमंत्री ख़ाजा मोहम्मद आसिफ़ ने कहा है कि इस देश के विरुद्ध अमेरिका के दबावों के अधिक हो जाने के बाद इस्लामाबाद का झुकाव बीजींग और मास्को की ओर हो गया है और पाकिस्तान की सरकार को आशा है कि वह चीन और रूस की सहायता से लाभांवित हो सकेगी। MM