ट्रम्प व मैकरोन का टकराव
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संसार के साठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में राष्ट्रवाद और एकपक्षवाद के ख़िलाफ़ फ़्रान्सीसी राष्ट्रपति का भाषण, ट्रम्प के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १४, २०१८ १३:४२ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प व मैकरोन का टकराव

संसार के साठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में राष्ट्रवाद और एकपक्षवाद के ख़िलाफ़ फ़्रान्सीसी राष्ट्रपति का भाषण, ट्रम्प के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ था।

प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति की 100वीं वर्षगांठ के जन्शन में ट्रम्प और मैकरोन की पहली मुलाक़ात ही विस्फोटक रही। हालांकि दोनों को दोस्त समझा जाता है लेकिन इस मुलाक़ात की कड़वाहट सभी ने महसूस की। मैकरोन, अमरीका से किसी हद तक फ़ासला सुरक्षित रखे जाने के पक्षधर हैं और वे जर्मन चांसलर मर्केल व अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि अमरीकाव यूरोप के सहयोग का काल समाप्त होता जा रहा है। इस आधार पर मैकरोन ने एक यूरोपीय सेना के गठन की बात की जो रूस,चीन और शायद अमरीका के मुक़ाबले में अपनी रक्षा कर सके। ट्रम्प ने, जिन्हें लगता था कि यूरोप हमेशा, अमरीका की सेवा में रहेगा, मैकरोन के सामने ही यह जुमला कहा कि उन्हें झटका लगा है क्योंकि अमरीका के घटकों के बीच से ही एक नया प्रतिद्वंद्वी सामने आ रहा है जो उसे अपना दुश्मन समझता है।

 

ट्रम्प ने पेरिस पहुंचते ही मैकरोन के इस वाक्य पर प्रतिक्रिया दिखाई और सोचा कि पक्षी के पर निकलने से पहले ही उसे काट दिया जाए लेकिन संसार के साठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में मैकरोन का अर्थपूर्ण भाषणा और राष्ट्रवाद व एकपक्षवाद की आलोचना मानो ट्रम्प के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ था। इससे पहले मर्केल भी राष्ट्रवाद और प्रथम विश्व युद्ध का कारण बनने वाली बातों की ओर से सचेत कर चुकी थीं। मैकरोन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग बहुपक्षवाद के बजाए एकपक्षवाद की राह पर चल रहे हैं वे उस चरमपंथ को हवा दे रहे हैं जिसने पहले और दूसरे विश्व युद्ध की आग भड़काई थी। संयोग से संसार के साठ देशों के नेताओं में से केवल ट्रम्प ने ही पेरिस की बहुपक्षवाद की काॅन्फ़्रेंस में भाग नहीं लिया और मैकरोन व मर्केल की बातों की पुष्टि कर दी।

 

ट्रम्प ने पेरिस से वाॅशिंग्टन वापस लौटने के बाद लगातार कई ट्वीट किए जिनसे उनके क्रोध का पता चलता है। इन ट्वीट्स में उन्होंने फ़्रान्स की जनता और राष्ट्रपति पर भड़ास निकाली। एक ट्वीट में उन्होंने यूरोपीय सेना के गठन के मैकरोन के प्रस्ताव को अत्यंत अपमानजनक बताया। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे विश्व युद्ध में फ़्रान्स ने किया किया? अमरीकियों के पहुंचने से पहले उन्होंने पेरिस में जर्मन भाषा सीखनी शुरू कर दी थी। उन्होंने इसी तरह एक ट्वीट में मैकरोन की मान्यता पर भी सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने ट्वीट किया कि समस्या यह है कि मैकरोन को फ़्रान्स में बहुम कम अर्थात 26 प्रतिशत मान्यता प्राप्त है और इस देश में बेरोज़गादी की दर लगभग दस प्रतिशत है। मैकरोन विषय बदलने की कोशिश कर में हैं। इसके अलावा फ़्रान्स से ज़्यादा राष्ट्रवादी कोई देश नहीं है और यहां के लोग बहुत घमंडी हैं।

 

वास्तविकता यह है कि यूरोप आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्र में अपने आपको अमरीका से बहुत पीछे देख रहा है और इस स्थिति से निकलने के लिए उसे दसियों साल कोशिश करनी होगी लेकिन उसे कहीं न कहीं से शुरू तो करना ही होगा और आरंभ बिंदु यही है कि वह सच्चाई को समझे और अतीत की तरह अमरीका पर निर्भर न रहे। दूसरी ओर यह अमरीका के लिए भी एक ख़तरे की घंटी है क्योंकि उसे एक ओर चीन और रूस जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों का सामना है और अगर इसी बीच यूरोप भी उसके मुक़ाबले में खड़ा हो जाता है तो उसकी समस्याएं निश्चित रूप से बढ़ जाएंगी। मैकरोन ने जिस प्रकार से खुल कर यूरोप को शक्तिशाली बनाने की बात की है और दुनिया के सबसे ज़्यादा शक्तिशाली राष्ट्रपति को नाराज़ करने का जोखिम उठाया है उससे लगता है कि यह उनकी अकेले की सोच नहीं बल्कि पूरा यूरोप उनके साथ है। मर्केल ने यूरोपीय सेना के गठन के उनके प्रस्ताव का भरपूर समर्थन करके इस बात की पुष्टि भी कर दी है। (HN)