ट्रंप सऊदी अरब के ग़ुलाम हैं" टल्सी गबार्ड
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अमेरिकी राष्ट्रपति यह कह रहे हैं कि संभव है कि जमाल खाशुकजी की हत्या से सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान अवगत रहे हों जबकि सीआईए कह रही है कि उसके पास इस बात के ठोस प्रमाण मौजूद हैं कि जमाल खाशुकजी की हत्या का आदेश मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था।  
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २३, २०१८ ०९:५३ Asia/Kolkata
  • ट्रंप सऊदी अरब के ग़ुलाम हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति यह कह रहे हैं कि संभव है कि जमाल खाशुकजी की हत्या से सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान अवगत रहे हों जबकि सीआईए कह रही है कि उसके पास इस बात के ठोस प्रमाण मौजूद हैं कि जमाल खाशुकजी की हत्या का आदेश मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था।  

अमेरिका के हवाई राज्य की सांसद ने सऊदी अरब के समर्थन में इस देश के राष्ट्रपति के हालिया वक्तव्यों की प्रतिक्रिया में कहा है कि ट्रंप सऊदी अरब के ग़ुलाम हैं।

हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस में हवाई राज्य की सांसद टल्सी गबार्ड ने अपने ट्वीट हैंडल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए लिखा है कि सऊदी अरब का गुलाम होना "पहले अमेरिकी" के नारे से विरोधाभास रखता है।

ज्ञात रहे कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की तानाशाही सरकार के आलोचक सऊदी पत्रकार की हत्या के बारे में एक विज्ञप्ति जारी करके एक बार फिर सऊदी अरब के साथ वाशिंग्टन के संबंधों के बाकी रहने पर बल दिया था।

ट्रंप ने अपनी विज्ञप्ति का आरंभ ईरान विरोधी बयानों से किया था और बल देकर कहा था कि संभव है कि जमाल ख़ाशुकजी की हत्या से सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान अवगत रहे हों परंतु इससे सऊदी अरब और अमेरिका के संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ट्रंप की इस विज्ञप्ति पर अमेरिका के भीतर और बाहर तीव्र प्रतिक्रिया जताई गयी थी और सब में इसकी आलोचना की गयी।

रोचक बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति यह कह रहे हैं कि संभव है कि जमाल खाशुकजी की हत्या से सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान अवगत रहे हों जबकि सीआईए कह रही है कि उसके पास इस बात के ठोस प्रमाण मौजूद हैं कि जमाल खाशुकजी की हत्या का आदेश मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था।  

यहां कुछ टीकाकार यह भी प्रश्न कर रहे हैं कि अमेरिका स्वयं को मानवाधिकारों की रक्षा का सबसे बड़ा ठेकेदार बताता और समझता है और दुनिया में लोकतंत्र का समर्थन करता है किन्तु यमन में सऊदी अरब की पाश्विक बमबारी में 16 हज़ार से अधिक निर्दोष यमनी मारे जा चुके हैं उसे वहां मानवाधिकार का हनन क्यों दिखाई नहीं पड़ता और सऊदी अरब में लोकतांत्रिक नहीं बल्कि तानाशाही सरकार है और उसके क्रिया- कलापों पर वह न कभी भी केवल कोई आपत्ति नहीं करता बल्कि सऊदी अरब के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध भी हैं। एसा क्यों हैं?

इसके जवाब में जानकार हल्कों का कहना है कि अमेरिका कैसी डेमोक्रेसी का कैसा समर्थक है इसे सब जानते हैं और अमेरिका मानवाधिकार की रक्षा का दम भरता है उसके इस दावे की वास्तविकता से भी सब अवगत हैं।

संक्षेप में यह कि अमेरिकी हित मापदंड हैं जिस देश के साथ संबंध रखना उसके हित में है वह देश कुछ भी करे अमेरिका मूक दर्शक बना रहेगा और उसके अपराधों पर अपनी आंखों को बंद रखेगा यहीं नहीं बल्कि निर्दोष लोगों की हत्या के लिए आधुनिकतम हथियार भी उसे देगा और जो देश उसकी वर्चस्ववादी नीतियों को नहीं मानेगा उस पर वह तरह तरह का आरोप लगाता रहेगा। MM