ट्रम्प के फैसले की सालगिरह पर एतिहासिक पराजय
अमरीकी दूतावास को बैतुलमुक़द्दस स्थानान्तरित करने के ट्रम्प के फैसले की पहली सालगिरह के अवसर पर फिलिस्तीनी संगठन हमास के खिलाफ अमरीका प्रस्ताव, महासभा में पारित नहीं हुआ और इस तरह से निकी हेली को संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने अंतिम दिनों में अमरीका की एतिहास पराजय देखना पड़ा।
संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीकी प्रतिनिधि निकी हेली ने पिछले सप्ताह एक एेसे प्रस्ताव का मसौदा पेश किया था जिसमें हमास पर आतंकवाद का आरोप लगाया गया था लेकिन सात दिसंबर को जब इस मसौदे पर मतदान हुआ तो वह पारित नहीं हो सका। वास्तव में इस मतदान से यह सिद्ध हो गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व जनमत, ट्रम्प का जिस तरह से एक साल पहले विरोधी था वैसे ही आज भी है और अमरीकी दूतावास को तेलअबीव से बैतुलल मुक़द्दस स्थानान्तरित करने के फैसले में ट्रम्प आज भी अलग थलग हैं। रोचक बात यह है कि निकी हेली ने जिस तरह बैतुलमुक़द्दस के बारे में अपने प्रस्ताव को पेश करने से पहले संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों को धमकी दी थी उसी तरह इस बार भी उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि प्रस्ताव के विरोध में मतदान का अंजाम भुगतना होगा लेकिन पिछले साल की भांति इस साल भी उनकी इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ और अमरीकी प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में सभी सदस्य देशों को मतदान का अधिकार है और किसी को भी वीटो अधिकार नहीं प्राप्त है इस लिए इस मंच पर न्याय होता है और यही वजह है कि 16 से 30 नंवबर के मध्य इस्राईल के खिलाफ 16 प्रस्ताव पारित हुए और यदि सात दिसंबर को पारित होने वाले दो प्रस्तावों को शामिल किया जाए तो तीन हफ्तों में इस्राईल के खिलाफ 18 प्रस्ताव पारित हुए जिस का अर्थ यह है कि इस्राईल के खिलाफ विश्व में एकमत हो रहा है और दुनिया इस्राईल और अमरीका की विस्तारवादी नीतियों के विरुद्ध एकजुट हो रही है । (Q.A.)