राष्ट्रपति के नववर्ष के भाषण पर भड़के फ़्रांसीसी
फ़्रांस के राष्ट्रपति के नववर्ष के भाषण में जनता की मांगों पर ध्यान न दिए जाने की वजह से जनता में आक्रोश व्याप्त है।
हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार हज़ारों की संख्या में पूंजीवाद के विरोधी आंदोलनकारी देश के विभिन्न क्षेत्रों के स्क्वायर पर राष्ट्रपति एमैनुल मैक्रां के नववर्ष का भाषण सुनने एकत्रित हुए और भाषण सुनने के बाद उनका ग़ुस्सा फूट गया और उन्होंने कहा कि मैक्रां के पद से हटने तक हमारे प्रदर्शन जारी रहेंगे।
फ़्रांस के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दो महीनों से जारी प्रदर्शनों के बाद जिसमें दस प्रदर्शनकारी मारे गये हज़ारों घायल व गिरफ़्तार हुए, राष्ट्रपति अपने भाषण में जनता के ज़ख्मों पर मरहम रखने के बजाए उन्होंने एक बार फिर जनता की मांगों की अनदेखी की है और फिर घिसे पिटे वादे किए और जुमलेबाज़ी का प्रदर्शन किया।
गत 17 नवम्बर से प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर अपना विरोध शुरू कर दिया था। यह प्रदर्शन पीली जैकेट वालों के प्रदर्शन के नाम से दुनिया भर में मशहूर हो गया। पिछले हफ़्ते के प्रदर्शन बहुत व्यापक थे जिनका फ्रांस में हालिया दशकों में कोई उदाहरण नहीं मिलता। प्रदर्शनों की शुरुआत तो ईंधन की क़ीमत में वृद्धि के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हुई लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कई आर्थिक नीतियों को निशाना बनाया।
देश में हिंसक प्रदर्शनों का क्रम जारी रहने के कारण राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रां को अपने स्टैंड से पीछे हटना पड़ा है और उन्होंने कहा था कि आर्थिक व सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल ठोस क़दम उठाएंगे।
मैकक्रां ने कहा कि देश में शांति बहाल करने के लिए हर उपाय और साधन का प्रयोग किया जाएगा। कम आमदनी वाले मज़दूर वर्ग का टैक्स कम करने, रिटायर्ट लोगों पर टैक्स बढ़ाने की योजना समाप्त करने, निम्नतम आय में 100 यूरो की वृद्धि करने तथा ओवर टाइम पर टैक्स समाप्त करने जैसे क़दम उठाने का मैकक्रां ने वादा किया था।
फ़्रांस कई साल से आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा है जिनमें मुद्रा स्फीति की दर में वृद्धि, बेरोज़गारी में वृद्धि तथा आर्थिक विकास की दर में कमी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इन्हीं कठिनाइयों की वजह से मैक्रां चुनाव जीते थे।
मैक्रां ने वर्ष 2017 में आर्थिक और सामाजिक सुधार की वादा किया था ताकि देश कठिनाइयों से बाहर निकले मगर मैक्रां ने जो क़दम उठाए उनका कोई विशेष प्रभाव नज़र नहीं आया बल्कि फ़्रांसीसी नागरिकों विशेष रूप से कम आय वाले वर्ग की कठिनाइयां बढ़ गईं। अब हालात यह है कि मैक्रां की आर्थिक नीतियों के साथ ही प्रदर्शनकारियों से निपटने के उनके कठोर रवैए पर भी कड़ी आपत्ति है। (AK)