नेपोलियन के गुमशुदा ख़ज़ाने की खोज
यह अफ़वाह दो सौ साल से गश्त कर रही है कि नेपोलियन की परास्त सेना मास्को से भागते समय अपने साथ 80 टन सोना और दूसरी क़ीमती चीज़ें ले गई थी।
रूस में यह कहानी मशहूर है कि वर्ष 1812 में फ़्रांसीसी सम्राट युद्ध में परास्त होने के बाद भागते समय अपने साथ एक ख़ज़ना ले गया था।
इस ख़जाने की तलाश में बहुत से लोगों ने काफ़ी समय नष्ट किया मगर अबर रूस के एक इतिहासकार ने इस बारे में एक नई थ्योरी पेश की है कि नेपोलियन ने कथित रूप से जो सोने से भरी बोगियां चुराई थीं वह उस स्थान पर मौजूद नहीं हैं जहां उन्हें खोजा जा रहा है।
व्याचिस्लाफ़ रीज़कोफ़ का कहना है कि दो सौ साल से ख़ज़ाना ढूंढने वाले लतग ग़लत जगह पर उसे ढूंढ रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में आई ख़बर के अनुसार उन्होंने एक स्थानीय समाचार पत्र को साक्षात्कार देते हुए कहा कि उन्हें अपना ध्यान रदनिया नामक शहर पर केन्द्रित करना चाहिए जो बेलारूस की सीमा के निकट स्थित है।
1830 से रूसी अधिकारी और पुरातन विशेषज्ञ इस ख़ज़ाने को तलाश कर रहे हैं मगर कुछ इतिहासकारों का कहना है कि अब तक ग़लत जगह पर खोज की गई।
जब जिस जगह को चिन्हित किया गया है वहां झील है और यह दावा किया जा रहा है कि झील की तह से ख़ज़ाना खोजा जा सकता है मगर बहुत से लोग इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं।
ख़ज़ाने की खोज के अभियान के अधिकारी व्लादमीर पोरयोयो ने रूसी मीडिया से कहा कि वह इस थ्योरी से संतुष्ट नहीं हैं।