पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ क्या है?
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पाकिस्तान में शिया मुसलमानों के खिलाफ होने वाले आतंकवादी हमले इस बात के सूचक हैं कि आतंकवादियों के कुछ लक्ष्य हैं जिनके लिए वे शिया मुसलमानों पर हमला करते हैं और उनमें सबसे महत्वपूर्ण आतंकवादियों का लक्ष्य पाकिस्तान में सांप्रदायिक दंगों को हवा देना और पाकिस्तान के शिया समाज को कमज़ोर करना है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २७, २०१९ १४:११ Asia/Kolkata

पाकिस्तान में शिया मुसलमानों के खिलाफ होने वाले आतंकवादी हमले इस बात के सूचक हैं कि आतंकवादियों के कुछ लक्ष्य हैं जिनके लिए वे शिया मुसलमानों पर हमला करते हैं और उनमें सबसे महत्वपूर्ण आतंकवादियों का लक्ष्य पाकिस्तान में सांप्रदायिक दंगों को हवा देना और पाकिस्तान के शिया समाज को कमज़ोर करना है।

पाकिस्तान के कराची नगर में शिया गुटों और पार्टी नेताओं की बैठक हुई जिसमें शियों की हत्या रोके जाने पर बल दिया गया। इस बैठक में भाग लेने वालों ने बल देकर कहा कि पाकिस्तान के अमेरिका से दूर हो जाने पर शीया मुसलमानों की हत्या कम हो गयी थी परंतु दोबारा इस्लामाबाद का वाशिंग्टन से निकट हो जाना इस देश में शिया मुसलमानों की हत्या के आरंभ हो जाने का कारण बना है।

आतंकवादी पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों व शहरों में शियों को अपने हमलों का लक्ष्य बनाते हैं परंतु कराची और हैदराबाद में उन्हें विशेषरूप से निशाना बनाया जाता है। सिपाहे सहाबा, लश्करे झंगवी और जमाअते अहरार जैसे आतंकवादी गुट शिया मुसलमानों पर हमला करते हैं।

पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में से 20 प्रतिशत से अधिक शिया हैं और यह पहली बार नहीं है कि जब शिया गुट और पार्टी नेता बैठक करके इस देश की सरकार से शिया मुसलमानों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाये जाने की मांग कर रहे हैं।

आतंकवादी और सांप्रदायिक गुटों ने हालिया वर्षों में दाइश के साथ बैअत करके शियों के खिलाफ अपने हमलों में वृद्धि कर दी है। इन सबके बावजूद पाकिस्तान के धर्मगुरू और विद्वान आतंकवादियों के मुकाबले में खड़े व डटे हुए हैं।

पाकिस्तान विद्वान परिषद के प्रमुख हाफिज़ ताहिर अशरफी ने कहा है कि पाकिस्तान के धार्मिक नेता एकजुट हैं और इस देश के लोगों के मध्य शांति व सुरक्षा और एकता बनाने रखने के प्रति कटिबद्ध हैं।

इसी प्रकार उन्होंने कहा कि विभिन्न नगरों में विभिन्न गुट और इमामे जमाअत जुमे की नमाज़ों में आतंकवादियों, अतिवादियों और हिंसा की समाप्ति के लिए कंपेन चलाने के प्रति वचनबद्ध हैं।

पाकिस्तान में शिया मुसलमानों के खिलाफ होने वाले आतंकवादी हमले इस बात के सूचक हैं कि आतंकवादियों के कुछ लक्ष्य हैं जिनके लिए वे शिया मुसलमानों पर हमला करते हैं और उनमें सबसे महत्वपूर्ण आतंकवादियों का लक्ष्य पाकिस्तान में सांप्रदायिक दंगों को हवा देना और पाकिस्तान के शिया समाज को कमज़ोर करना है।

पाकिस्तान के एक सुरक्षा विशेषज्ञ मोहम्मद आमिर राना ने इस देश में सांप्रदायिक जड़ों के बारे में कहाः अतिवाद के विस्तार में सबसे अधिक भूमिका पाकिस्तान में मौजूद धार्मिक मदर्सें निभा रहे हैं।

रोचक बात यह है कि पाकिस्तान के 20 हज़ार से अधिक धार्मिक मदर्से सऊदी अरब की सहायता से चल रहे हैं और धर्मभ्रष्ट वहाबी संप्रदाय की जो शिक्षाएं हैं वे अतिवाद और आतंकवाद के विस्तार का कारण बन रही हैं।

इसी कारण पाकिस्तान की सरकार की ओर से शिया मुसलमानों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाये जाने के वादे के बावजूद उन्हें आतंकवादी हमलों का सामना है।

इसी कारण बहुत से टीकाकारों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान में सऊदी अरब के समर्थन से चलने वाले धार्मिक मदर्सों की नकेल नहीं कसी जायेगी तब तक आतंकवादी हमलों के कम या खत्म होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। MM